**जब सरकार खुद गाँव पहुँची…खबर की शुरुआत वहीं से, जहाँ आमतौर पर खबरें नहीं पहुँचतीं…

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🛑 BREAKING GROUND REPORT | पुरोला, उत्तरकाशी | 19 दिसंबर 2025

**जब सरकार खुद गाँव पहुँची…

तो बदली तस्वीर, बदली तक़दीर!**

‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान ने चन्देली में रचा सुशासन का जीवंत उदाहरण


खबर की शुरुआत वहीं से, जहाँ आमतौर पर खबरें नहीं पहुँचतीं…
पहाड़ के दूरस्थ गांव, लंबी दूरी, सीमित संसाधन और दफ्तरों के चक्कर—
लेकिन आज न्याय पंचायत चन्देली में नज़ारा बिल्कुल अलग था।

यहाँ सरकार खुद जनता के द्वार पर खड़ी थी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चल रहे 45 दिवसीय विशेष अभियान ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ के तहत
विकासखंड पुरोला के इंटर कॉलेज हुडोली में एक ऐसा बहुउद्देशीय शिविर लगा,
जिसने सरकारी योजनाओं को कागज़ों से निकालकर सीधे लोगों के हाथों तक पहुँचा दिया।


मंच नहीं, समाधान था ये शिविर

शिविर की अध्यक्षता कर रहे थे
उपप्रभागीय वनाधिकारी टौंस – अरविन्द सिंह मुनफा,
और उनके साथ मौजूद थे लगभग हर विभाग के अधिकारी—
लेकिन आज अधिकारी नहीं, सेवक नज़र आ रहे थे।

👉 आय, जाति, स्थायी प्रमाण पत्र
👉 नरेगा, बीपीएल, ई-केवाईसी
👉 पेंशन, जन्म-मृत्यु पंजीकरण
👉 कृषि यंत्र, उद्यान कार्ड
👉 SHG ऋण स्वीकृति
👉 स्वास्थ्य जाँच और दवाइयाँ
👉 रोज़गार व कैरियर काउंसलिंग

जो काम महीनों लगते थे,
वो आज कुछ ही घंटों में पूरे हो रहे थे।


आंकड़ों में नहीं, एहसास में बड़ी उपलब्धि

  • 120 से अधिक ग्रामीणों को ग्राम्य विकास योजनाओं का लाभ
  • 50 हजार रुपये के चेक सीधे हाथों में
  • 30 स्वयं सहायता समूहों को SBI से ऋण स्वीकृति
  • 20 शिकायतें दर्ज, जिनमें से 8 का मौके पर ही समाधान
  • बुजुर्गों को पेंशन, किसानों को औज़ार, महिलाओं को सम्मान

स्वास्थ्य शिविर में दवा लेते एक बुजुर्ग बोले—

“पहली बार लगा कि सरकार हमें ढूंढते हुए आई है।”


गांव की आवाज़: “अब तहसील नहीं जाना पड़ता”

चन्देली और हुडोली के ग्रामीणों के चेहरों पर राहत साफ दिखी।
ग्राम प्रधानों से लेकर आम नागरिक तक, एक ही बात कह रहे थे—

“अब छोटे कामों के लिए शहर नहीं भागना पड़ता।
सरकार खुद हमारे घर आई है।”


जनप्रतिनिधि और प्रशासन, एक मंच पर

इस मौके पर मौजूद रहे—

  • हुडोली ग्राम प्रधान बबीता देवी
  • चन्देली न्याय पंचायत के 19 ग्राम प्रधान
  • 06 क्षेत्र पंचायत सदस्य
  • खंड विकास अधिकारी सुरेश चौहान
  • तहसीलदार कमल किशोर किरौला
  • नोडल अधिकारी डॉ. वीरेन्द्र कठैत
    और कई विभागीय अधिकारी

अंत में एक सवाल… और एक संदेश

क्या सुशासन का मतलब सिर्फ फाइलें और घोषणाएँ हैं?
या फिर वही, जो आज चन्देली में दिखा—

👉 सरकार का जनता तक पहुँचना
👉 योजनाओं का ज़मीन पर उतरना
👉 और भरोसे का दोबारा पैदा होना

चन्देली ने दिखा दिया—
जब सरकार चलकर आती है,
तो लोकतंत्र सच में ज़िंदा नज़र आता है।

📍 *यह सिर्फ एक शिविर नहीं था…
यह पहाड़ के गांवों में उम्मीद का नया पड़ाव था।

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