प्रीतम सिंह के जन्म दिन पर तोहफे से काँग्रेस मे क्यो मचा बबाल?

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प्रीतम सिंह के जन्मदिन पर PCC चीफ़ कारण माहरा ने ऐसा क्या तोहफा दिया कि अब उत्तराखंड काँग्रेस मे उबाल आ गया है ।  प्रीतम के जन्म दिन पार्टी मे केक कटा तो इसमे इतने  सवाल क्यों पैदा हो रहे है दरअसल जन्मदिन कि पार्टी के बाद कांग्रेस के भीतर जंग फिर से क्यों शुरू हो गई। लोग पूछ  रहे है कि  करण मेहरा ने प्रीतम  सिंह को जन्मदिन का ऐसा कौन सा तोहफा दिया कि जिस पर पार्टी के भीतर टकराव तेज हो गया है आखिर करन  ने बर्थडे पर गिफ्ट देने के नाम पर ऐसा क्या किया कि प्रीतम के समर्थक भड़क गए ?

वह गिफ्ट क्या है उसका जिक्र भी करेंगे लेकिन पहले कांग्रेस दफ्तर के आसपास लगे पोस्टर पर नजर दौड़ाइए  जिसमें प्रीतम सिंह तो नजर आ रहे हैं उनके समर्थक भी हैं लेकिन कहीं,  न तो करण माहरा दिख रहे  हैं और न दिल्ली दरबार  के बड़े नेता। पोस्टर से   साफ संदेश है कि प्रीतम सिंह उत्तराखंड मे एक एक अलग तरह की सियासत करने वाले हैं

संगठन की मजबूती के लिए पीसीसी चीफ़ करण माहरा  को क्या करना चाहिए इसके लिए प्रीतम अपनी तरफ से नसीहत भी दे रहे । अब आते है बर्थडे गिफ्ट पर जो करण माहरा  ने प्रीतम के  जन्मदिन से पहले ही दे दिया और वह बर्थडे गिफ्ट कुछ और नहीं प्रीतम के करीबी माने जाने वाले लालचंद शर्मा के पद से विदाई थी।  महानगर अध्यक्ष के पद पर लाल  चंद शर्मा लंबे वक्त से डटे हुए थे ।  करण महाराणा ने लाल चंद शर्मा को एक चिट्ठी लिखवाई  उस चिट्ठी में कहा गया कि उन्हे पद मुक्त किया जाता है , उसमें उदयपुर संकल्प का जिक्र किया गया है कि अब नए लोगों को पार्टी मे  मौका दिया जाएगा। करण ने यह गिफ्ट प्रीतम के बर्थ डे से पहले दिया था लिहाजा लचन्द शर्मा भी लाल  पीले हो रहे है और उन्हे उदयपुर संकल्प का हवाल देते हुए लंबे समय से अपने पदो  पर डटे हुए नेताओ पर कार्यवाही  करने कि नसीहत दे रहे हैं । उन्होने कहा कि लंबे समय से जो लोग पार्टी पदों पर बैठे हुए हैं संगठन को उनकि भी  छुट्टी करने छुट्टी का मादा दिखाना चाहिए

उदयपुर के चिंतन से निकला हुआ जिन्न कांग्रेस के भीतर जंग  जैसे हालात बना रहा है खासतौर पर  उत्तराखंड में जहां कांग्रेस पहले से ही अलग धड़ो  में ही बंटी   हुई है अब एक धड़े के नेता पर एक्शन हुआ है कार्यवाही हुई है तो दूसरा  धड़ा  खफा हो गया है दूसरे धड़े के नेता अब कई तरह के दलीलें पेश कर रहे हैं

सवाल बगावत का नहीं है सवाल नेताओं की नाराजगी और उनके इशारों मे दिये गए बयान का है। कांग्रेस में जिस तरीके का तूफान उठा है उस तूफान को कैसे थामा जाएगा यह समझ से परे है कांग्रेस के बड़े नेता का जन्मदिन और उनके जन्मदिन पर कांग्रेस कार्यालय में लगा यह बैनर जिसमें ना प्रदेश अध्यक्ष की तस्वीर न दिल्ली के बड़े नेताओं की तस्वीर इससे  बहुत हद तक राजनीतिक गहमागहमी समझी जा सकती है लेकिन इस गर्मी के बीच बर्थडे गिफ्ट से उठा विवाद आखिर कैसे खत्म होगा इसका इंतजार है।

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