कीर्ति इंटर कॉलेज बना योग का तीर्थ, डीएम आर्या ने की शुरुआत – हजारों लोगों ने एक साथ साधा श्वास और चेतना
उत्तरकाशी | विशेष रिपोर्ट
शनिवार की सुबह जब उत्तरकाशी की पहाड़ियां धुंध से निकल रही थीं, तभी जिला मुख्यालय स्थित कीर्ति इंटर कॉलेज में जीवन का एक अलग ही सूर्योदय हुआ।
11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जब जिलाधिकारी प्रशांत कुमार आर्या ने योगासन करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया, तो लगा जैसे पूरा जनपद एक सामूहिक चेतना में विलीन हो गया।

“योग केवल व्यायाम नहीं, यह जीवन की शैली है – शरीर, मन और आत्मा का मेल।”
— जिलाधिकारी प्रशांत कुमार आर्या
गंगोत्री से नेलांग तक, योग की लहर
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम से लेकर पुरोला, चिन्यालीसौड़, और सीमावर्ती वाइब्रेंट विलेज नेलांग-जादुग तक, योग की ऐसी गूंज सुनाई दी जो केवल श्वास नहीं, संस्कृति को भी जोड़ रही थी।
भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवानों ने दुर्गम इलाकों में भी योग का प्रदर्शन कर यह संदेश दिया कि “स्वास्थ्य और संतुलन की सीमा नहीं होती।”
योग: परंपरा से प्रगति की ओर
गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने योग को स्वस्थ जीवनशैली का मूल बताया।
“प्रधानमंत्री श्री मोदी ने योग को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाया, अब हमें इसे हर घर तक पहुँचाना है।”
बीजेपी जिलाध्यक्ष नागेंद्र चौहान, नगर पालिका अध्यक्ष भूपेंद्र चौहान, और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता कर जनमानस को प्रेरित किया।

हर गांव में गूंजा ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ का मंत्र
जिलाधिकारी के निर्देशानुसार योग दिवस इस बार “Yoga for One Earth, One Health” थीम पर आधारित रहा।
प्रत्येक तहसील, स्कूल, पंचायत और संस्थान में योग कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जहां बुजुर्गों से लेकर स्कूली बच्चों तक ने उत्साह से भाग लिया।
आखिरी आसन: आत्मनिरीक्षण का क्षण
जिस मिट्टी में ऋषियों ने ध्यान साधा, वहां आज आमजन ने योग साधा।
ये सिर्फ उत्सव नहीं था, ये उत्तरकाशी की आत्मा की पुकार थी — “सांसों को समझो, जीवन को साधो।”
🔸 Meru Raibar विशेष टिप्पणी:
“जब पूरा जनपद एक साथ सांस लेता है, तब वह केवल जीवित नहीं होता — वह जागता है। योग केवल तन का उत्सव नहीं, यह आत्मा का उत्सव है। उत्तरकाशी अब योग की नई राजधानी बन रहा है।”
