कोरोना वैश्विक महामारी भले ही देश और दुनिया में अफरा-तफरी मचा रही हो किंतु जेलों में बंद कैदियों के लिए कोरोना वरदान ही साबित हुई है । दरअसल देश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी जानवरों की तरह ठूंस ठूंस कर भरे गए हैं किंतु किन्तु इस महामारी से पहले जेल के अंदर बंद कैदियों के लिए बना हुआ मानवाधिकार भी जेल की दीवारों पर सर पटक कर भी चार दिवारी से बाहर नही निकल पाया था , अब जब कोरोना महामारी ने विश्वव्यापी असर दिखाना शुरू किया तो जेल के अंदर अव्यवस्थाएं का मानवाधिकार भी बाहर निकल आया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उच्च अधिकार प्राप्त समिति के निर्णय के बाद 215 विचाराधीन और 75 दोष सिद्ध कैदियों को फिलहाल 6 महीने की जमानत पर रिहा कर दिया गया है।
जितेंद्र पेटवाल
– कैदियों की संख्या के हिसाब से कुमाऊँ की सबसे बड़ी हल्द्वानी जेल में आज सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद राज्य सरकार द्वारा बनी उच्च कमेटी ने 7 साल से कम सजा वाले और विचाराधीन 300 के करीब कैदियों की रिहाई का फरमान जारी कर दिया है, जिसके बाद आज हल्द्वानी जेल से 46 कैदियों की रिहाई हुई है,
हल्द्वानी जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्य का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाई कमेटी द्वारा निर्णय जारी कर दिया गया है, जिसके बाद 7 साल से कम की सजा वाले और विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत और पैरोल पर 6 महीने के लिये छोड़ा गया है, वही इन कैदियों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा गाड़ी भी मुहैया कराई गई, ताकि वह सकुशल अपने घर को पहुंच सके हम आपको बता दें कि कोरोना वायरस के चलते सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों की जेलों को यह निर्देश दिए थे कि उनके यहां इस तरह के कैदियों को छोड़ा जाए, उत्तराखंड के हल्द्वानी की एकमात्र ऐसी जेल है जहां पर सबसे अधिक तीन सौ के आसपास कैदियों को छह माह के पैरोल और अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया है जेल से छूटने वाले कैदी अधिकतर चोरी और टप्पेबाजी के आरोपों में जेल में बंद थे।
मनोज आर्य, वरिष्ठ जेल अधीक्षक हल्द्वानी जेल
