देहरादून स्मार्ट सिटी में ‘स्मार्ट घोटाला’? CAG रिपोर्ट से मचा सियासी भूचाल

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कांग्रेस का बड़ा आरोप — “सैकड़ों करोड़ खर्च, लेकिन शहर और बदहाल”
सीबीआई जांच की मांग, भाजपा सरकार पर संरक्षण देने का आरोप


देहरादून:
देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना… अब सियासी तूफान में बदल गया है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी शहर की हालत पर सवाल उठ रहे हैं। अब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने इस पूरे मामले में नई आग लगा दी है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत धस्माना ने आरोप लगाया है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भारी अनियमितताएँ और घोटाले हुए हैं — और यह सब सरकार के संरक्षण में हुआ।


“हम पहले से कह रहे थे, अब CAG ने मुहर लगा दी”

एआईसीसी सदस्य और उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने की योजना 2017 में तीसरे चरण में स्वीकृत हुई थी और इसे 2023 तक पूरा किया जाना था।

लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।

उन्होंने कहा कि लगातार समय बढ़ाने के बावजूद 2025 में आधे-अधूरे और निम्न स्तर के कामों के साथ प्रोजेक्ट को पूरा घोषित कर दिया गया।

“छह–सात साल तक पूरे शहर को खोदकर रख दिया गया, करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन शहर स्मार्ट होने के बजाय और बदहाल हो गया।”
— सूर्यकांत धस्माना


शहर खोदा गया, सुविधाएँ नहीं मिलीं

धस्माना के अनुसार स्मार्ट सिटी मिशन के नाम पर शहर में कई बड़े प्रोजेक्ट किए गए —

  • भूमिगत विद्युत व्यवस्था
  • आधुनिक ट्रैफिक सिस्टम
  • सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट
  • स्कूलों और कॉलेजों में CCTV और Wi-Fi
  • स्मार्ट बोर्ड
  • स्मार्ट शौचालय

लेकिन आरोप है कि इनमें से कई काम या तो हुए ही नहीं, या सिर्फ दिखावे के लिए निम्न स्तर पर पूरे किए गए।


“सरकार गूंगी-बहरी बनी रही”

कांग्रेस नेता का कहना है कि स्मार्ट सिटी के कामों में अनियमितताओं के मुद्दे कई बार उठाए गए, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।

उन्होंने आरोप लगाया कि कार्य आवंटन से लेकर गुणवत्ता तक हर स्तर पर गड़बड़ियाँ हुईं और जिम्मेदार संस्थाओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।


CBI जांच की मांग

धस्माना ने पूरे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।

“अगर इस पूरे प्रोजेक्ट की उच्च स्तरीय जांच हो जाए तो यह भाजपा सरकार का सबसे बड़ा घोटाला साबित होगा।”


अब सवाल जनता का

देहरादून के लोग भी पूछ रहे हैं —
अगर सैकड़ों करोड़ खर्च हुए तो शहर को मिला क्या?

टूटी सड़कें, अधूरे प्रोजेक्ट और बार-बार खोदी गई गलियां…

क्या देहरादून सच में ‘स्मार्ट’ हुआ, या सिर्फ कागजों में स्मार्ट बना दिया गया?


(Meru Raibar News | देहरादून से बड़ी खबर)

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