राजधानी से लापता होते बच्चे?

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  • , बच्चे और माँ बाप में गुप्त कोड संस्था ने लिया जन्म हरीश असवाल नई दिल्ली।

  • दिल्ली एन सी आर में हो रहे लगातार बच्चे का अपहरण को देखते हुए सर्च माई चाइल्ड संस्था ने शनिवार को गढ़वाल भवन पंचकुईया रोड दिल्ली में की जनवार्ता एबम फ़ास्ट ट्रेक चाइल्ड रेस्क्यू सेल (FTCRC) पूरे भारतवर्ष हेतु सरकार से की माँग राष्ट्रीय राजधानी छेत्र एन सी आर में औसतन प्रतिदिन 18 बच्चे गुमसूदा आँकड़ा है जिसमें बच्चे घर वापिस नहीं हो सके जादातर बच्चे मंदिर परिसर से अपहरण कर के ले जाने की रिपोर्ट दर्ज है आख़िरकार बच्चे कहाँ और कौन ले जाता है यह पर भी मन में बहुत सवाल होते है क्या पुलिस प्रशासन नाकाम है या उनके पास ब्यवस्था की कमी है या जनसंख्या आधारित अतिरिक्त कार्य का बोझ है या अनुभव की कमी जैसा साइबर क्राइम सेल है ठीक उसी तरह बच्चों को ढूँढने के लिये अतिरिक्त अनुभवी पुलिस सेल विभाग होना चाहिये ।
  • जिसमें संस्था की संस्थापिका कुसुम कंडवाल भट्ट और ख़ास मेहमान आरुषि निशंक (पोखरियाल) व अन्य सामाजिक संस्थापक एमब मुख्यवार्ता अथिति संजय दरमोड़ा -अधिवक्ता दिल्ली उच्चन्यायालय , द्वारा बच्चों और माता पिता या परिवार में एक कोड होना ज़रूरी है जिससे कि बच्चे ग़लत हाथ मे ना चला जा सके किस तरह कोड का इस्तेमाल करना चाहिये और किन किन बातों का ध्यान रखना होगा तथा सरकार से की गयी माँग जैसा की
    पूरे भारतवर्ष में लागू होना चाहिये ।
    फ़ास्ट ट्रेक रेस्क्यू सेल , केवल बच्चों के सुरक्षा हेतु शिक्षित पुलिस नियुक्ति, ज़ीरो एफ. आइ. आर. , पुलिस को आधारकार्ड के इस्तेमाल की आज़ादी , बायोमिट्रिक़्स प्रौदयोगिकी जिससे चेहरा पहचान सकते है , केंद्रकृत डेटा यानी पूरे भारतवर्ष में एक जगह हो , एफ. आइ.आर. पर तुरंत कार्यवाही नही करने वाले अधिकारी को दंड , की माँग संस्था द्वारा की गयी जिसमे उत्तराखंड समाज के गणमान्य लोग समिल थे ।
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