“16 साल के सचिन ने छुआ एवरेस्ट का शिखर, उत्तरकाशी में जश्न का माहौल — स्कूल ने लुटाया सम्मान, परिवार की आंखों में छलके आंसू”

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🟦 ग्राम दड़माली पुजारगांव का बेटा बना उत्तरकाशी का हीरो, PM श्री राजकीय कीर्ति इंटर कॉलेज में भव्य सम्मान समारोह, “मोबाइल छोड़ो, सपनों को पकड़ो” का संदेश देकर छू गए दिल


🟩 ओपनिंग

जब 16 साल का एक लड़का एवरेस्ट की बर्फीली चोटियों पर तिरंगा फहराए, तो सिर्फ उसकी ऊंचाई नहीं बढ़ती — बल्कि पूरे ज़िले का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। यही कर दिखाया उत्तरकाशी के सचिन कुमार ने, जिसने 18 मई को माउंट एवरेस्ट फतह कर, सीमांत ज़िले के लोगों के दिलों में उम्मीद की नई लौ जला दी। आज, उसी साहसी बेटे को उसके स्कूल PM श्री राजकीय कीर्ति इंटर कॉलेज उत्तरकाशी में पूरे शान-ओ-शौकत से सम्मानित किया गया।


🟨 खबर का विस्तार

एवरेस्ट पर चढ़ाई, सीधी स्कूल की मंच तक
गांव दड़माली पुजारगांव, ब्लॉक डुंडा के सचिन, आल इंडिया एनसीसी माउंट एवरेस्ट एक्सपीडिशन का हिस्सा रहे। 16 साल की उम्र में एवरेस्ट फतह करने वाला सचिन इस दल का सबसे युवा सदस्य था। आज स्कूल के प्रांगण में उसकी एक झलक पाने को भीड़ उमड़ पड़ी।

“सचिन ने उत्तरकाशी की कीर्ति पताका को नई ऊंचाई दी है। ये सिर्फ उनका नहीं, पूरे जिले का सपना पूरा हुआ है।”
— लोकेन्द्र पाल सिंह परमार, प्रधानाचार्य


गर्व से छलक पड़ीं मां की आंखें
कार्यक्रम में सचिन की मां अनीता देवी, पिता कुंवरपाल और बहन मोनिका भी मंच पर सम्मानित हुए। अनीता देवी की आंखों में आंसू थे, पर चेहरे पर मुस्कान।

“मेरा बेटा दुनिया की सबसे ऊंची जगह पर खड़ा हुआ… इससे बड़ी खुशी कोई नहीं।”
— अनीता देवी, सचिन की मां


बातें जो दिल छू गईं
सचिन ने अपने एवरेस्ट अनुभव साझा करते हुए छात्रों को मोबाइल की लत छोड़ने और अनुशासन का पालन करने की सलाह दी।

“सपनों को सच करने के लिए ऊंचाई पर जाना पड़ता है — मोबाइल पर नहीं, ज़िंदगी में!”
— सचिन कुमार


सम्मान और इनाम
समारोह में सचिन को शॉल, स्मृति चिन्ह और नगद पुरस्कार दिए गए। पूर्व प्रधानाचार्य बी.एस. राणा ने 5,000 रुपये और एनसीसी प्रभारी संजय जगूड़ी ने 11,000 रुपये की राशि भेंट की। कार्यक्रम में मुख्य शिक्षा अधिकारी अमित कोटियाल, जिला शिक्षा अधिकारी शैलेन्द्र अमोली समेत स्कूल के तमाम शिक्षक और स्टाफ मौजूद रहे। तालियों की गड़गड़ाहट थमने का नाम ही नहीं ले रही थी।


🟫 क्लोजिंग

16 साल का सचिन आज सिर्फ एवरेस्ट विजेता नहीं, बल्कि उत्तरकाशी के हर युवा के लिए एक नई उम्मीद बन गया है। उसकी कहानी हमें याद दिलाती है —
“सपने बड़े देखो, रास्ते मुश्किल ही सही… लेकिन पहाड़ भी तब तक ऊंचा है, जब तक कोई सचिन उसे फतह न कर ले!”


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