महिला सशक्तिकरण को पुलिस पत्रकार और वकील एक मंच पर।

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ग्रामिण क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण

RJS की चित्रकूट में 91वीं बैठक में पुलिस,पत्रकार ,
वकील और समाजसेवियों की पहल।

चित्रकूट/ अंकित तिवारी

सोलह जुलाई को चित्रकूट में आयोजित बैठक में पत्रकार, पुलिस,वकील, और समाजसेवियों ने भाग लिया।
इसका संचालन बैठक के आयोजक और बुंदेली प्रेस क्लब के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने किया। पत्रकार हरिनारायण पाण्डेय ने गांधीजी का हवाला देते हुए कहा कि “महिलाएं रात‌ में भी 12:00 बजे महिलाएं घर-बाहर आ जा सके ,तभी मैं उसे रामराज्य मानूंगा”।
अभी तो ऐसी स्थिति शहरों में कुछ हद तक है लेकिन गांव के लिए तो दिल्ली दूर है। श्री पाण्डेय ने कहा कि महिलाओं को हर कदम पर स्त्री होने का एहसास दिलाया जाता है ।
इसपर चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि कुछ घरों में दोयम दर्जे का व्यवहार भी होता है। कभी कभी वो यौन शोषण का शिकार हो जाती हैं। शिक्षकों और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि इन्हें प्राइवेट पार्ट की जानकारी सही तरीके से दी जाए। घरेलू हिंसा में महिलाएं ही महिलाओं की करने में आगे हैं। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी अरूणा आसफ अली को उनकी जयंती पर याद करते हुए कहा कि आज़ादी के आंदोलन में महिलाओं ने बहादुरी दिखाई। आज ये कमजोर कैसे हो गईं।ये विचारणीय है।
खबर लहरिया की वरिष्ठ पत्रकार गीता जी ने कहा कि बालपन से ही महिलाओं को शिक्षा खानपान आदि में भेदभाव किया जाता है। पुरुष प्रधान समाज इसलिए उन्हें दबना भी पड़ता है। दिन में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। कानून तो महिलाओं के लिए कई हैं, लेकिन कानून को कारगर तरीके से लागू नहीं किया जाता ।उनकी कंप्लेंट कागज पर लिखी जाती है लेकिन वह कागज कहां जाता है पता ही नहीं चलता।
महिला थाना प्रभारी कर्वी, चित्रकूट की अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि अधिकारियों द्वारा जैसा आदेश होता है पूरी तरह से हम लोग उसका समाधान करने की कोशिश करते हैं। एंटी रोमियो स्क्वायड बना हुआ है और वह काफी तेज गति से काम करता है। जैसे ही किसी भी महिला के साथ कुछ भी अनहोनी हो तो वह सौ नंबर डायल कर सकती है। और तत्काल वहां पर पुलिस पहुंचने की कोशिश करती है। और हम लोग कॉलेज स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम भी करते हैं ।लड़की कहीं अकेले जा रही हो तो सौ नंबर पर डायल करें तो सुविधा जरूर उसे मिलेगी ।हम लोग मानिकपुर में जूडो कराटे अभी-अभी कराएं लेकिन लड़कियों को भी चाहिए कि वे डरें नहीं, सबला बनें।
राजापुर विकास मंच के अध्यक्ष एडवोकेट अनुज शुक्ला ने कहा कि महिलाएं में शिक्षा की कमी और जागरूकता की कमी के चलते महिला हिंसा का शिकार हो रही हैं। महिलाओं को घुंघट की आड से बाहर आना होगा ।वहीं पर सुधा पांडे का कहना था कि जागरूकता बढ़ाने के लिए शहरों से ज्यादा ग्रामीण परिवेश को प्राथमिकता देनी होगी । महिलाओं को कोई बात होने पर चुप करा दिया जाता है। ऐसी बहुत सी महिलाएं हमारे पास आती हैं, वह पीड़ित तो होती हैं लेकिन वह मुंह नहीं खोल पातीं और बीबोलना नहीं चाहती। इसलिए ग्रामीण महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर जागरूक करने की जरूरत है। गांव की लड़कियों को जूडो कराटे और मार्शल आर्ट सिखाने की जरूरत है।

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