नौनिहालों की जान से खिलवाड़ नहीं!”
✍️ देहरादून | 18 जनवरी 2026
सोचिए… अगर आपकी आंखों के सामने स्कूल की छत गिर जाए!
अगर मासूम बच्चे किताबों के बजाय डर के साए में पढ़ने को मजबूर हों!
अब ऐसा नहीं होगा।
देहरादून में बच्चों की जिंदगी से जुड़े एक बड़े खतरे पर सरकार और प्रशासन ने निर्णायक प्रहार किया है।
⚡ “अब एक भी जोखिम बर्दाश्त नहीं” – CM का साफ संदेश
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद जिले के 76 जर्जर और जानलेवा स्कूल भवनों को एक झटके में ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सीधा संदेश है—
“नौनिहालों के जीवन से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं।”
👊 DM की सख्ती, 10 दिन में हिल गया सिस्टम
जिलाधिकारी सविन बंसल ने जब अफसरों पर शिकंजा कसा, तो सालों से धूल फांक रही फाइलें 10 दिन में बाहर आ गईं।
- 100 स्कूलों की जर्जर भवन रिपोर्ट
- 79 स्कूल पूरी तरह निष्प्रोज्य
- 17 आंशिक रूप से जर्जर
- ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत
“बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जोखिम में पढ़ाई नहीं होगी।”
— जिलाधिकारी सविन बंसल
🏫 कौन-कौन से स्कूल खतरे में थे?
रिपोर्ट चौंकाने वाली है—
- 66 प्राथमिक विद्यालय
- 13 माध्यमिक विद्यालय
- वर्षों से दरारों, झुकी छतों और टूटती दीवारों में चल रही थी पढ़ाई
अब पहली बार इन्हें पूरी तरह निष्प्रोज्य घोषित किया गया।
📚 पढ़ाई रुकेगी नहीं, व्यवस्था पहले
प्रशासन ने साफ कर दिया है—
👉 पहले बच्चों की वैकल्पिक व्यवस्था
👉 फिर ध्वस्तीकरण
- 63 स्कूलों में वैकल्पिक पढ़ाई पहले ही तय
- 16 स्कूलों के लिए तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था के आदेश
🛠️ PWD को अल्टीमेटम
लोक निर्माण विभाग को 7 दिन के भीतर एस्टिमेट तैयार करने के निर्देश।
कोई बहाना नहीं, कोई देरी नहीं।
“जो भवन जानलेवा हैं, वे गिरेंगे ही।”
— प्रशासन का दो टूक संदेश
💔 टूटती दीवारें, बचता बचपन
सड़ते सिस्टम की दीवारों के नीचे
अब बचपन दबेगा नहीं।
देहरादून में यह कार्रवाई सिर्फ ध्वस्तीकरण नहीं,
👉 एक चेतावनी है
👉 एक बदलाव की शुरुआत है
🔚 आख़िरी बात
स्कूल सिर्फ इमारत नहीं होते,
वहां सपने पलते हैं।
अब उन सपनों पर गिरती छतें नहीं,
सरकार की सख्ती की छांव होगी।
