उत्तरकाशी में संविधान का उत्सव, तिरंगे के नीचे गूंजा राष्ट्रगान
डीएम प्रशांत आर्य ने ली परेड की सलामी, लोकतंत्र और कर्तव्य का दिया संदेश
उत्तरकाशी | 26 जनवरी
ठंडी पहाड़ी हवा, अनुशासनबद्ध कदमों की गूंज और गर्व से लहराता तिरंगा… पुलिस लाइन ज्ञानसू में आयोजित मुख्य समारोह में 77वां गणतंत्र दिवस पूरे सम्मान, गरिमा और राष्ट्रभक्ति के जज़्बे के साथ मनाया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने ध्वजारोहण कर भव्य पुलिस परेड की सलामी ली। मंच पर गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान और दर्जाधारी राज्यमंत्री प्रताप सिंह पंवार की मौजूदगी ने आयोजन को और खास बना दिया।
“कर्तव्यनिष्ठ लोक सेवक ही मजबूत भारत की नींव” — डीएम
परेड की सलामी के बाद अपने संबोधन में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने जनपदवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं और संविधान की शक्ति को याद दिलाया।
“हमारा संविधान हमें अधिकार ही नहीं, कर्तव्य भी देता है। देश के विकास और जन-कल्याण के लिए लोक सेवकों का प्रतिबद्ध रहना बेहद जरूरी है।”
उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और विधि के शासन के साथ आगे बढ़ते हुए विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है।
अनुशासन, शौर्य और समर्पण की झलक
पुलिस बैंड की देशभक्ति धुनों के बीच— 🚔 उत्तराखंड पुलिस 🚨 आईटीबीपी 👮♀️ महिला होमगार्ड्स 🎖️ एनसीसी कैडेट्स 🔥 एसडीआरएफ, फायर सर्विस, यातायात पुलिस ने शानदार परेड और झांकियों से समारोह को गौरवपूर्ण बना दिया।
हर कदम में अनुशासन, हर सलामी में देशभक्ति साफ झलक रही थी।
“संविधान ही हमारी ताकत” — विधायक सुरेश चौहान
गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने कहा—
“आज ही के दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। यही संविधान हमें एक सशक्त और लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाता है।”
बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल
ऋषिराम शिक्षण संस्थान, गोस्वामी गणेशदत्त विद्या मंदिर और पुलिस परिवार के बच्चों ने देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों की तालियां बटोरीं।
सेवा भी, संकल्प भी
गणतंत्र दिवस पर— 🍎 अस्पतालों में मरीजों को फल वितरण 🧹 जिलेभर में स्वच्छता अभियान जैसे कार्यक्रमों ने “सेवा ही राष्ट्रभक्ति है” का संदेश दिया।
पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने कहा—
“पुलिस बल नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ देश के विकास में योगदान के लिए संकल्पबद्ध है।”
तिरंगे के नीचे एक संकल्प
समारोह में प्रशासनिक अधिकारी, सेना, पूर्व सैनिक और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
**गणतंत्र दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं— यह याद दिलाता है कि अधिकार तभी सुरक्षित हैं, जब कर्तव्य पूरी निष्ठा से निभाए जाएं। 🇮🇳