कपकोट में इंसानियत की मिसाल! 39 यूनिट रक्तदान से बचेंगी कई ज़िंदगियां

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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बना जीवनदान का केंद्र — छात्र, शिक्षक और स्थानीय लोग एक साथ आए


बागेश्वर (कपकोट)।
जब जरूरत खून की हो… और लोग खुद आगे बढ़कर अपनी नसों से उम्मीद बहा दें—तो वही होता है असली मानवता का उत्सव!
कपकोट के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जहां स्वैच्छिक रक्तदान शिविर ने 39 यूनिट रक्त जुटाकर कई जिंदगियों को नई सांस देने का संकल्प लिया।


❤️ हर बूंद में जिंदगी

प्राचार्य डॉ. मधुलिका पाठक के निर्देशन में और वीरा फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस शिविर में महाविद्यालय परिवार और स्थानीय लोगों ने दिल खोलकर भाग लिया।

छात्र हों, शिक्षक हों या कर्मचारी—हर कोई एक ही मिशन पर था:
“किसी की जिंदगी बचानी है।”


💉 युवा बने असली हीरो

शिविर में कई छात्रों और शिक्षकों ने बिना किसी हिचक के रक्तदान किया।
डॉ. दीपक कुमार, डॉ. भरत गिरी गोसाई, सुमन, रूपाली गढ़िया और ललिता जैसे नाम इस मानवता के अभियान के सच्चे नायक बनकर उभरे।

उनकी आंखों में संतोष था… क्योंकि उन्होंने सिर्फ रक्त नहीं, बल्कि उम्मीद दी थी।


🗣️ “रक्तदान सबसे बड़ा दान”

कार्यक्रम संयोजक डॉ. निर्मित शाह ने कहा—

“एक यूनिट रक्त किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है। युवाओं की यह भागीदारी समाज के लिए प्रेरणा है।”

वहीं सहसंयोजक डॉ. मुन्ना जोशी और टीम ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


🌄 पहाड़ में जागी नई चेतना

कपकोट जैसे शांत पहाड़ी क्षेत्र में इस तरह का आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक जागरूकता का संकेत है।
यह बताता है कि अब युवा सिर्फ सपने नहीं देख रहे… बल्कि समाज के लिए खड़े भी हो रहे हैं।


🔚 अंत में एक सवाल…

जब एक छोटी सी पहल 39 जिंदगियों को बचाने की उम्मीद जगा सकती है…
तो क्या हम भी आगे बढ़कर किसी की जिंदगी का कारण बनेंगे?

क्योंकि… आपका दिया हुआ रक्त, किसी की धड़कन बन सकता है। ❤️

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