“ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना” से आत्मनिर्भर बन रहीं रुद्रप्रयाग की महिलाएं
देहरादून/रुद्रप्रयाग: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड की महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नया इतिहास रच रही हैं। राज्य सरकार की “ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना” ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया संबल दिया है और गांव की महिलाओं को न केवल रोजगार बल्कि आत्मसम्मान भी प्रदान किया है।
रुद्रप्रयाग जनपद के गांवों में अब महिलाएं पारंपरिक जैविक संसाधनों से अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाकर “लोकल फॉर वोकल” के सपने को साकार कर रही हैं। बद्री गाय का गोबर, नीम, पीपल, आम की लकड़ी, गुलाब और गेंदे के फूल जैसी स्थानीय सामग्री से तैयार ये उत्पाद न केवल प्राकृतिक हैं, बल्कि बाज़ार में भी खास मांग बना रहे हैं।
🪔 गांव की महिलाएं बन रही हैं उद्यमी
जय नारी सहायता समूह की कोषाध्यक्ष सुषमा देवी बताती हैं,
“इस परियोजना के तहत पहले हमें 6 दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। फिर हमने धूपबत्ती निर्माण का कार्य शुरू किया। गांव की अन्य महिलाएं भी इससे जुड़ रही हैं। आज हम 5 समूहों के माध्यम से यह काम कर रहे हैं।”
उन्नति स्वायत्ता सहकारिता सहायता समूह की समूह सुगमकर्ता गीता बेलरा बताती हैं,
“प्रशिक्षण के बाद हमें RCTC (Rural Cooperative and Training Centre) से तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता मिली। अब हमारे समूह से जुड़ी 10 ग्राम सभाएं और 11 ग्राम संगठन हैं। महिलाएं घर बैठे रोजगार पा रही हैं और अपने उत्पाद हिलांस आउटलेट और ऑनलाइन माध्यमों से बेच रही हैं।”
💡 एक योजना, कई बदलाव:
✅ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर ✅ जैविक संसाधनों से तैयार उत्पादों का निर्माण ✅ घर बैठे स्वरोजगार के नए रास्ते ✅ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल ✅ समाज में महिला नेतृत्व को बढ़ावा
📢 Meru Raibar की राय:
यह सिर्फ योजना नहीं, महिलाओं के स्वाभिमान का आंदोलन है। रुद्रप्रयाग की महिलाएं अब सिर्फ गृहणी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही हैं।
📌 यदि आप भी अपने गांव की महिलाओं को स्वावलंबी बनाना चाहते हैं, तो “ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना” से जुड़ें — स्वरोजगार का सुनहरा रास्ता यहीं से शुरू होता है।