सेवा क्षेत्र नीति में बड़ा बदलाव – पहाड़ी जिलों को प्राथमिकता

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उत्तराखंड कैबिनेट के फैसले: आत्मनिर्भरता, पारदर्शिता और विकास की ओर एक सशक्त कदम


1. अधिप्राप्ति नियमावली 2024 – स्थानीय सशक्तिकरण को मिली नई उड़ान
राज्य की आवश्यकताओं और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने अधिप्राप्ति नियमावली 2017 में व्यापक संशोधन करते हुए नई अधिप्राप्ति नियमावली 2024 को मंजूरी दी है।
अब 10 करोड़ रुपये तक के कार्य केवल स्थानीय लोगों व फर्मों को ही दिए जाएंगे, जो पहले 5 करोड़ तक सीमित थे। इससे स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

  • स्वयं सहायता समूहों और MSME को 10% तक की क्रय वरीयता दी जाएगी।
  • निविदा में अब ई-बैंक गारंटी (e-BG) का प्रावधान, जिससे प्रक्रिया होगी पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी।
  • IFMS पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली भी शुरू होगी।

2. मेगा इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2025 – उत्तराखंड बनेगा निवेशकों का नया ठिकाना
राज्य को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश का आकर्षक गंतव्य बनाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने मेगा इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट पॉलिसी 2025 को हरी झंडी दे दी है।

  • निवेश श्रेणियाँ:
    लार्ज (₹50-200 करोड़), अल्ट्रा लार्ज (₹200-500 करोड़), मेगा (₹500-1000 करोड़), अल्ट्रा मेगा (₹1000 करोड़ से अधिक)
  • 50 लाख तक की स्टॉम्प ड्यूटी प्रतिपूर्ति और 15 वर्षों तक प्रोत्साहन राशि
  • पर्वतीय जिलों को अतिरिक्त पूंजीगत प्रोत्साहन

3. मिथाईल एल्कोहॉल को विष की श्रेणी में शामिल – जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता
कैबिनेट ने उत्तराखंड विष (कब्जा एवं विक्रय) नियमावली 2023 में संशोधन करते हुए मिथाईल एल्कोहॉल को विष की सूची में शामिल किया है।
यह निर्णय मानव जीवन की सुरक्षा और अवैध उपयोग पर रोक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


4. लेखा संवर्ग कर्मचारियों को राहत – वेतन विसंगति होगी दूर
2019 से पहले कार्यरत सहायक लेखाकार/लेखाकारों को उनकी सेवा शर्तों के अनुरूप उचित वेतनमान देने का फैसला लिया गया है।
अब उन्हें लेवल 7 से प्रमोशन पर लेवल 8 वेतनमान का लाभ मिलेगा।


5. बांध सुरक्षा रिपोर्ट विधानसभा में पेश – जनता को मिलेगी जानकारी
राज्य में स्थित 21 प्रमुख बांधों की सुरक्षा रिपोर्ट अब विधानसभा के पटल पर प्रस्तुत की जाएगी।
बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 के तहत यह एक पारदर्शी और जवाबदेह कदम है।


6. निबंधन लिपिक सेवा नियमावली 2025 – भर्ती व पदोन्नति में स्पष्टता
कैबिनेट ने उत्तराखंड निबंधन लिपिक वर्गीय सेवा नियमावली 2025 को मंजूरी दी है।
इससे भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी, पदोन्नति सुनिश्चित और कर्मचारियों को मिलेगा सुदृढ़ कैरियर मार्गदर्शन


7. सेवा क्षेत्र नीति में संशोधन – निवेश का रुख अब कम विकसित क्षेत्रों की ओर
देहरादून, ऋषिकेश, मसूरी, मुनि की रेती जैसे विकसित क्षेत्रों को नीति से बाहर कर अब निवेश को कम विकसित पहाड़ी क्षेत्रों में प्राथमिकता दी जाएगी।
शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण संस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए तय किए गए हैं सख्त मानदंड


8. चाय विकास बोर्ड को मिलेगा बल – 11 नए पद होंगे सृजित
अल्मोड़ा मुख्यालय वाले उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड को 11 नए पदों की मंजूरी दी गई है (4 नियमित, 7 आउटसोर्स)।
यह निर्णय पर्वतीय चाय उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय रोजगार में वृद्धि करेगा।


9. उत्तराखंड योग नीति 2025 – योग को मिलेगा नया वैश्विक मंच
उत्तराखंड सरकार ने देश की पहली योग नीति को मंजूरी दी है।
इस नीति के प्रमुख बिंदु:

  • 2030 तक 5 नए योग हब की स्थापना
  • सभी आयुष वेलनेस सेंटरों में योग सेवाएं
  • स्कूलों-कॉलेजों में योग पाठ्यक्रम
  • 15 से 20 अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से साझेदारी का लक्ष्य
  • योग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य, एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की स्थापना

समापन:
उत्तराखंड कैबिनेट के ये फैसले स्पष्ट संकेत देते हैं कि राज्य सरकार स्थानीय विकास, पारदर्शिता, रोजगार और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दे रही है। आने वाले वर्षों में ये नीतियाँ राज्य के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी।

– मेरु रैबार के लिए विशेष रिपोर्ट
लेखक: Girish Gairola संपादक:

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