महिला पुलिसकर्मियों को बताया गया उनका कानूनी हक़, आवाज उठाने का दिया संदेश
“चुप रहना अब गुनाह है… और बोलना हक़!”
देहरादून पुलिस लाइन का सभागार आज औरों से अलग था। वहां खाकी में सजीं महिलाएं सिर्फ कानून की रखवाली नहीं कर रही थीं… वो अपने ही हक़ की लड़ाई लड़ने के गुर सीख रही थीं। मंच पर बार-बार एक ही संदेश गूंजा — “डरना मत, आवाज उठाओ!”
मुख्य खबर:
आज दिनांक 27 जून 2025 को पुलिस लाइन देहरादून में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों और महिलाओं के अधिकारों पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।

जनपद की समस्त महिला पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इस कार्यशाला में शामिल हुईं। मंच पर Internal Complaint Committee (ICC) की अध्यक्ष पुलिस अधीक्षक रेनु लोहानी, पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश जया बलूनी, पुलिस उपाधीक्षक रीना राठौर और विधि सलाहकार मौजूद रहे।
पुलिस अधीक्षक रेनु लोहानी ने मंच से कहा:
“हमारे विभाग में महिलाएं भी दिन-रात कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। अगर कहीं भी उनके साथ गलत होता है, तो उन्हें डरने की जरूरत नहीं। कानून उनके साथ है।”
कार्यशाला में यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि किसी भी महिला कर्मचारी को उत्पीड़न जैसी घटना का शिकार होने पर Internal Complaint Committee तक तुरंत बात पहुंचानी चाहिए। ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके और पीड़िता को न्याय मिल सके।
लोकल कलर और भावनात्मक एंगल:
कार्यशाला में मौजूद महिला पुलिस कर्मियों की आंखों में आत्मविश्वास झलक रहा था। किसी ने कहा —
“आज पहली बार लगा कि वर्दी पहनने वाली महिलाओं की भी अपनी आवाज़ है। हम डरेंगे नहीं। हम चुप नहीं रहेंगे।”

वहीं एक अन्य महिला कांस्टेबल ने कहा:
“हम दूसरों को न्याय दिलाते हैं, लेकिन अपने हक के लिए भी हमें अब आवाज़ उठानी होगी।”
“ये सिर्फ एक कार्यशाला नहीं थी… ये उस खामोशी के खिलाफ बिगुल था, जिसने न जाने कितनी महिलाओं की ज़ुबां सी दी थी। देहरादून पुलिस लाइन से उठा ये संदेश दूर तक जाएगा — कोई भी महिला अब अकेली नहीं है… ना घर में, ना दफ्तर में… और ना ही वर्दी में।”
