भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी का राहुल गाँधी पर करारा हमला

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देहरादून। लोक सभा सांसद तथा भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एवं राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने आज राहुल गाँधी की नकारात्मक राजनीति पर करारा हमला बोला और कहा कि भारतीय जनता पार्टी, राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी द्वारा संसद की कार्यवाही को लगातार बाधित करने और संवैधानिक संस्थाओं के अपमान की कड़े शब्दों में निंदा करती है। आज यह स्पष्ट हो गया है कि राहुल गांधी सदन में चर्चा करना ही नहीं चाहते, वे वास्तव में संसद को दंगल का मदान बनाना चाहते हैं। राहुल गाँधी का एकमात्र उद्देश्य देश की प्रगति को रोकना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को धूमिल करना है।
श्री बलूनी ने कहा कि राहुल गाँधी को बोलने के लिए सदन में बार-बार मौके दिए गए, आज भी उन्हें बोलने का समय दिया गया लेकिन राहुल गाँधी के पास देश को बदनाम करने के सिवा कोई एजेंडा नहीं है। अपनी पोल खुलने के डर से राहुल गाँधी हर बार सदन से भागने के बहाने ढूंढते रहते हैं। पूरे देश ने देखा कि किस प्रकार राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान व्यवधान उत्पन्न किया। यह न केवल सदन की अवमानना है, बल्कि देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति का घोर अपमान है।
भाजपा सांसद ने कहा कि बजट जैसी महत्वपूर्ण चर्चा से भागना कांग्रेस की पुरानी आदत बन चुकी है। सदन में आसन पर पेपर फाड़कर फेंकना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में अड़ंगा डालना यह दर्शाता है कि कांग्रेस के पास जनता से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं बचा है। इतना ही नहीं, संसद में प्रधानमंत्री पर हमले की साजिश तक कांग्रेस पार्टी की ओर से रची गई, इसकी जितनी निंदा की जाय, कम है। संसद की गरिमा को राहुल गाँधी और कांग्रेस ने बार-बार, तार-तार किया है। राहुल गाँधी वैसे भी झूठ और प्रोपेगेंडा की राजनीति करने में माहिर हो चुके हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख ने कहा कि यह विडंबना है कि जो कांग्रेस चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समझौता (डवन्) करती है, वह आज सुरक्षा की बात कर रही है। डोकलाम विवाद के समय रात के अंधेरे में चीनी दूतावास में गप्पें लड़ाने वाले राहुल गांधी को देश की सेना और संप्रभुता पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। भाजपा सांसद ने कहा कि राहुल गांधी जब भी विदेश जाते हैं, वहां की धरती से भारत के लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को अपमानित करते हैं। विदेशी ताकतों से भारत के आंतरिक मामलों में दखल की मांग करना उनके ’वैचारिक दिवालियेपन’ और राष्ट्रविरोधी मानसिकता का प्रमाण है।

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