एक बड़ा संस्थान – ब्लैक फंगस के मरीज दवा के लिए परेसान
संकायाध्यक्ष बोले : राज्य सरकार पर लगाई टकटकी, आश्वासन मिला , लेकिन नहीं मिली दवाई
कोरोना की दूसरी वेव में संक्रमण का आंकड़ा कम होने के साथ ब्लैक फंगस के आंकड़ो में उछाल चिंता का कारण सिर्फ इसलिए ही नहीं है कि इसके संक्रमण से आँखे बाहर निकल रही है बल्कि इसलिए भी कि देश के जाने माने संसथान एम्स ऋषिकेश में इससे लड़ने के लिए पर्याप्त दवा मौजूद नहीं है – उत्तराखंड सरकार से अभी सिर्फ आश्वासन मिला है |
अमित कंडीयाल ऋषिकेश
प्रदेश में कोरोना संक्रमण कि दूसरी महामारी के बाद तीसरी वेव से पहले ब्लैक फंगस के बढ़ते आंकड़े इसे महामारी घोषित करने तक पर्याप्त नहीं है | कोरोना के घटती संख्या के साथ ब्लैक फंगस के आंकड़ो में भी उछाल आने लगा है। वहीं देश और प्रदेश के जाने माने बड़े संस्थान में से एक एम्स ऋषिकेश में ब्लैक फंगस के उपचार में प्रयोग होने वाली दवा की कमी परेशानी का सबब बनी हुई है, एम्स प्रशासन आवश्यक दवाइयों के लिए राज्य सरकार पर उम्मीद लगाए बैठा हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि राज्य सरकार से एम्स ऋषिकेश को सिर्फ आश्वासन ही मिला है , अभी तक किसी प्रकार की दवाई नहीं मिल पाई है। यह हम नहीं कह रहे हैं यह एम्स के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर यू.बी. मिश्रा का कहना है। प्रोफेसर यू.बी. मिश्रा ने बताया कि 1 महीने में एम्स को 2500 वाइल्स की आवश्यकता है जो पूरी नहीं हो पा रही।
यू. बी. मिश्रा ( अस्पताल संकायाध्यक्ष , एम्स )
म्यूकर माइकोसिस ट्रीटमेन्ट टीम के प्रभारी और ईएनटी विभाग के सर्जन डॉ अमित त्यागी ने कहा कि शुगर के पेशेन्टों के लिए इस बीमारी से विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि बिना डाक्टरी सलाह के स्टेरॉयड का सेवन शुगर वाले कोविड पेशेन्टों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है ।
अमित त्यागी ( प्रभारी , चिकित्सा टीम )
सोमवार की देर शाम तक एम्स ऋषिकेश में ब्लैक फंगस के कुल 83 मरीज आ चुके हैं। जिनमें उपचार के दौरान मरीजों की मृत्यु का आंकड़ा 6 हो गया हैं। वहीं एक मरीज को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है। अब एम्स में कुल ब्लैक फंगस के 77 रोगी भर्ती हैं। इस तरह ऋषिकेश एम्स में बढ़ते ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या के बावजूद दवाइयों की पूर्ति न होना मरीजों का जीवन संकट में डाल सकता हैं। एम्स प्रशासन ने अपनी ओर से राज्य सरकार से आवश्यक दवाइयों के लिए अनुरोध भी किया हैं बावजूद राज्य सरकार की तरफ से कोरा आश्वासन मिला लेकिन दवाई नहीं।
