भूस्खलन, झरने, उफनती नदियां… पहाड़ों में कहर की आहट!
देहरादून | 29 जून “कुदरत का मिज़ाज बिगड़ा है… और इसकी जद में हैं हजारों श्रद्धालु और पहाड़ों के लोग!”
उत्तराखंड में मानसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने चेतावनी जारी की है — अगले 72 घंटे बेहद खतरनाक हैं। भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी होते ही चारधाम यात्रा अगले 24 घंटे के लिए रोक दी गई है।
“तीर्थ यात्रियों की ज़िंदगी सबसे पहले। कोई जोखिम नहीं लिया जाएगा।” – प्रशांत आर्य, जिलाधिकारी
सड़कों पर सन्नाटा, पहाड़ों में खौफ
जिलाधिकारी ने सभी एसडीएम और पुलिस को आदेश दिए हैं कि तीर्थ यात्रियों को सुरक्षित जगहों पर रोका जाए। यात्रियों की भीड़ अचानक जगह-जगह रुकी पड़ी है। कई जगह होटल-पहुंच मार्ग पर पानी भर गया है।
रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर जैसे पहाड़ी जिलों में हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। भूस्खलन, सड़कें टूटने, नदी-नालों के उफान की आशंका जताई गई है।
“नदी का पानी रातों-रात किसी की छत तक आ सकता है। डर लग रहा है अब पहाड़ों में रहना।” – किरण रावत, रुद्रप्रयाग निवासी
कहां-कहां रेड अलर्ट?
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है — 29 जून से 1 जुलाई तक देहरादून, टिहरी, पौड़ी, चम्पावत, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर में भारी से भारी बारिश हो सकती है।
इन इलाकों में तेज आंधी, बिजली गिरने और पहाड़ी दरकने का भी डर है।
रोक दें यात्राएं, बचाएं जान!
प्रशासन ने साफ कहा है – जरूरी न हो तो पर्वतीय इलाकों की यात्रा टाल दें। नदी-नालों के पास न जाएं। रात के वक्त ज्यादा सावधानी बरतें।
“लोगों से अपील है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, पर हालात को हल्के में भी न लें। अगले तीन दिन पहाड़ों के लिए सबसे नाज़ुक हैं।” – बिक्रम सिंह, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून
⛔ अब सवाल ये है — श्रद्धा भारी पड़ेगी या सावधानी? क्योंकि पहाड़ खूबसूरत हैं… पर जब कुदरत नाराज़ हो जाए, तो वही पहाड़ मौत के दरवाज़े बन सकते हैं!