आपदा में टूटा था रास्ता… अब मजबूत फोल्डिंग पुल ने फिर जोड़ा श्रद्धा और सुरक्षा का सफर!
ओपनिंग
केदारनाथ की ओर बढ़ते कदमों के बीच रामबाड़ा की गूंजती हवाएं आज राहत की सांस ले रही हैं। वो जगह, जहां पिछले साल तबाही ने रास्ते छीन लिए थे, वहां अब 48 मीटर स्पान का नया फोल्डिंग सेतु खड़ा होकर श्रद्धालुओं को फिर से उम्मीद की राह दिखा रहा है।

मुख्य खबर
आपदा ने पिछले साल रामबाड़ा के अस्थायी पुलों को अपनी चपेट में ले लिया था। भू-स्खलन और नदी के उफान ने यात्रा को करीब दो महीने तक रोक दिया।
तत्काल राहत में लगाया गया 18 मीटर का छोटा फोल्डिंग पुल, भूगोल की चुनौती और नदी के कटाव के आगे कमज़ोर पड़ रहा था।
इमोशनल और लोकल रंग
रामबाड़ा के घोड़े-खच्चर चालक महेश ने कहा –
“भैय्या, पुल टूटने से दो वक्त की रोटी मुश्किल हो गई थी। अब नए पुल से आस लौटी है।”
वहीं, श्रद्धालु उर्मिला देवी की आंखों में चमक थी –
“अब केदारनाथ बाबा की राह सुगम हो गई। डर खत्म हुआ।”
तकनीकी पक्ष और उम्मीद
डीडीएमए के अधिशासी अभियंता विनय झिक्वान ने बताया –
“SDRF मद से स्वीकृत 48 मीटर स्पान फोल्डिंग सेतु तैयार है। इससे रामबाड़ा-भीमबली क्षेत्र में यात्रा सुचारु होगी। जाम की समस्या भी काफी हद तक खत्म होगी।”
पावरफुल क्लोजिंग लाइन
केदारनाथ की राह सिर्फ एक रास्ता नहीं, श्रद्धा और विश्वास की डोर है। और रामबाड़ा में खड़ा ये नया पुल बता रहा है – मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी हों, हिमालय की गोद में आस्था कभी नहीं टूटती!
