नशामुक्ति केंद्र संचालक समेत पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज

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देहरादून। रिस्पना पुल के पास स्थित एक नशामुक्ति केंद्र में भर्ती युवक को पीटने का मामला सामने आया है। नेहरू कालोनी थाना पुलिस ने केंद्र के संचालक समेत पांच व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। रायवाला निवासी व्यक्ति ने नेहरू कालोनी थाने में तहरीर दी कि उनका बेटा नशा करता था। नशा छुड़वाने के लिए उन्होंने उसे रिस्पना पुल स्थित लाइफ केयर फाउंडेशन रिहेव सेंटर में भर्ती करवाया।
24 अक्टूबर को केंद्र में भर्ती एक युवक की मृत्यु होने की सूचना मिलने पर वह बेटे को घर लेकर चले गए। कुछ दिन उनका बेटा परेशान रहा। जब उन्होंने कारण पूछा तो उसने बताया कि नशामुक्ति केंद्र में उसकी पिटाई की जाती थी। आरोपित निखिल, सचिन प्रताप, फैजल, मेहताब अंसारी और सौरभ हर दिन गाली-गलौज करते थे और धमकी देते थे कि यदि किसी को बताया तो उसे जान से मार देंगे। नेहरू कालोनी थाना निरीक्षक सतबीर बिष्ट ने बताया कि नशामुक्ति केंद्र के संचालक निखिल चमोली, सचिन प्रताप, फैजल, मेहताब अंसारी व सौरभ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

लाइफ केयर फाउंडेशन रिहेव सेंटर में भर्ती गुजराड़ा निवासी एक अन्य युवक की 15 दिन पहले मौत हो गई थी। इस मामले में नेहरू कालोनी थाना पुलिस ने 16 अक्टूबर को आरोपित निखिल, सचिन, मेहताब, शुभम और फैजल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था। दो सप्ताह बाद भी पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। इंस्पेक्टर सतबीर बिष्ट ने बताया कि अब तक कोई खास साक्ष्य हाथ न लगने के कारण आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। दूसरी ओर मृतक की बहन इशिता ने नेहरू कालोनी थाना पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि पूछने के बावजूद भी पुलिस कोई जवाब नहीं दे रही है। इससे पता लगता है कि पुलिस आरोपितों को बचा रही है। सीओ नेहरू कालोनी पल्लवी त्यागी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु की वजह स्पष्ट नहीं हुई है। ऐसे में बिसरा व खून के सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही अगली कार्रवाई हो सकेगी। अगस्त महीने में क्लेमेनटाउन स्थित नशा मुक्ति केंद्र में युवती के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था। तब तत्कालीन एसएसपी योगेंद्र सिंह रावत ने सभी थानाध्यक्षों को उनके क्षेत्र में चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों की रिपोर्ट एक हफ्ते के भीतर देने के निर्देश दिए थे। थानाध्यक्षों को 12 बिंदुओं का फार्मेट भी दिया गया था। जिसके तहत रिपोर्ट में केंद्र के नाम के साथ उसके रजिस्ट्रेशन, वहां तैनात स्टाफ (चिकित्सक व अन्य), भर्ती मरीजों की संख्या, शुल्क, कक्ष व बेड, सीसीटीवी, दैनिक रजिस्टर, शिकायत रजिस्टर का विवरण दर्ज करना था। साथ ही विजिटिंग चिकित्सक के भ्रमण संबंधी रजिस्टर और केंद्र की स्थिति पर सक्षम अधिकारी की टिप्पणी भी देने को कहा गया था, लेकिन इस आदेश पर आगे कार्रवाई ही नहीं बढ़ी।

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