उर्गम जोशीमठ|
देवभूमि उत्तराखंड में इंसानों की देवी देवताओ के साथ कई कहानियो के किस्से भरे पड़े है | यहाँ देवता भी प्रशंन्न होकर इंसानों के साथ न्रत्य करते है | चमोली जिले की उर्गम घाटी में भगवान बद्रीनाथ की विदाई को एम् धार्मिक मेले का स्वरूप दिया गया है और वर्षो से यही परंपरा चली आ रही है | भगवन बदरीनारायण के कपाट खुलने से पूर्व हर तीसरे वर्ष उर्गम घाटी में गरूड छाड़ मेला आयोजित होता है लोक मान्यता है कि भगवान नारायण पंचबद्री ध्यान बदरी उर्गम घाटी से गरूड में सवार होकर बदरीनारायण की ओर चले जाता है| इस मेले में भर्की भूमियाल देवता मुख्य अतिथि होते है| कोरोना काल को देखते हुए इस मेले में बाहरी लोगो के प्रवेश को प्रतिबंधित करते हुए मेला संपन्न किया गया|
संजय कुँवर उर्गम जोशीमठ
उर्गम घाटी का चोपता मेला सम्पन
कोरोना संकट के चलते बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने के बाद सीमांत जोशीमठ प्रखण्ड के कई दूरस्थ गाँवों में इन दिनों सांस्कृतिक सामाजिक और पौराणिक आस्था पर्व विधि विधान से मनाये जा रहे है, भूमि का भुमियाल क्षेत्र पाल घंटाकर्ण के सानिध्य में जोशीमठ की सांस्कृतिक और प्राकृतिक जैव विविधता से भरी उर्गम घाटी का नन्दा स्वनूल गरूड छाड़ मेला सम्पन हुआ | दो दिवसीय यह मेले में 36 घंटे तक चलता है | इस दौरान जागर गायन किया जाता है जिसमें सभी देवी देवताओं का आह्वान होता है, आज दूसरे दिन दोपहर में झूमैला दांकुड़ी नृत्य का आयोजन हुआ जिसमे भगवान नारायण अपने वाहन गरूड में सवार होकर मेला स्थल में पहुंचते है, बदरीनारायण के कपाट खुलने से पूर्व हर तीसरे वर्ष गरूड छाड़ मेला आयोजित होता है लोक मान्यतानुसार कहा जाता है कि भगवान नारायण पंचबद्री ध्यान बदरी उर्गम घाटी से गरूड में सवार होकर बदरीनारायण की ओर चले जाता है इस मेले में भर्की भूमियाल देवता मुख्य अतिथि होते है ग्रामीण ने भगवान नारायण भूमि क्षेत्रपाल भगवती नन्दा से महामारी से मुक्ति की कामना कि है |
