🔥 कंडार देवता की डोली, हरि महाराज का आशीर्वाद और जनसैलाब… 🔥
उत्तरकाशी | मकर संक्रांति विशेष
भागीरथी की कलकल धारा…
देवडोलियों की गूंज…
ढोल-दमाऊ की थाप…
और आस्था से भरा जनसागर…
उत्तरकाशी आज सिर्फ एक नगर नहीं, लोक आस्था का महाकुंभ बन गया।

🛕 देवताओं के सानिध्य में शुरू हुआ माघ मेला
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उत्तरकाशी का पौराणिक माघ मेला (बाड़ाहाट कू थौलू) कंडार देवता और हरि महाराज की डोलियों के सानिध्य में विधिवत शुरू हुआ।
रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्ज्वलित कर ऐतिहासिक मेले का शुभारंभ किया।
देवडोलियों के साथ चमाला की चौंरी पर डोली नृत्य, रासो-तांदी नृत्य और पारंपरिक अनुष्ठानों ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
🙏 “यह लोक आस्था का महाकुंभ है” – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने माघ मेले को उत्तरकाशी की आत्मा बताते हुए कहा—
“यह मेला हमारी सांस्कृतिक पहचान है।
देवभूमि की संस्कृति से किसी को भी छेड़छाड़ की इजाजत नहीं दी जाएगी।”
उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी आज आध्यात्मिक पहचान के साथ विकास के पथ पर अग्रसर है।

🏗️ विकास के बड़े ऐलान: सड़क, अस्पताल, टनल
मुख्यमंत्री ने मंच से विकास कार्यों की लंबी सूची रखी—
• ₹1000 करोड़ से अधिक की सड़क परियोजनाएं
• ₹23 करोड़ की लागत से 50 बेड का क्रिटिकल केयर यूनिट
• पुरोला में ₹46 करोड़ से उपजिला अस्पताल
• सिलक्यारा टनल का ब्रेकथ्रू – यमुनोत्री-गंगोत्री दूरी 25 किमी कम
• यमुनोत्री में हेलीपैड, बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई योजनाएं
👩🌾 12 हजार “लखपति दीदी”, बढ़ता रिवर्स पलायन
मुख्यमंत्री ने कहा—
“उत्तरकाशी में 12 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
यह आत्मनिर्भर उत्तराखंड की असली तस्वीर है।”
उन्होंने बताया कि आज रिवर्स पलायन बढ़ रहा है और लोग गांवों की ओर लौट रहे हैं।
⚖️ सख्त कानून, जीरो टॉलरेंस
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“देवभूमि की मर्यादा तोड़ने वालों के लिए कोई जगह नहीं।”
उन्होंने दंगा विरोधी कानून, धर्मांतरण कानून, सख्त भू-कानून,
ऑपरेशन कालनेमी, और UCC लागू करने का जिक्र किया।
👮♂️ युवाओं को बड़ी राहत
मुख्यमंत्री धामी ने कहा—
“27 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शिता से नौकरी मिली है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब जल्द ही 2000 युवाओं को नियुक्ति मिलेगी।”
⚖️ अंकिता भंडारी केस पर भावुक बयान
मुख्यमंत्री ने कहा—
“अंकिता को न्याय दिलाने के लिए पहले भी खड़े थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे।”
🛕 बाबा विश्वनाथ और शक्ति मंदिर में पूजा
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर और शक्ति मंदिर में पूजा-अर्चना की और संतों के आशीर्वचनों पर आधारित शिलापट्टों का लोकार्पण किया।
✨ अंत में एक भाव…
जब परंपरा, आस्था और विकास एक मंच पर मिलते हैं—
तब सिर्फ मेला नहीं लगता…
इतिहास जीवित हो उठता है।
**उत्तरकाशी का माघ मेला —
जहां देवता उतरते हैं,
और देवभूमि अपनी पहचान खुद बयान करती है।
