🔥 प्रेमनगर की सड़कों पर उबाल: ‘अंकिता को न्याय दो’ के नारों से गूंजा इलाका 🔥
CBI जांच की मांग को लेकर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, बाजार ठप
देहरादून | 07 जनवरी 2026
प्रेमनगर की सड़कों पर आज गुस्सा, आक्रोश और इंसाफ की पुकार एक साथ फूट पड़ी। अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने और वीआईपी की भूमिका उजागर करने की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जनसैलाब सड़कों पर उतर आया।
“अंकिता को न्याय दो, दोषियों को फांसी दो” — इन नारों के बीच प्रेमनगर बाजार कुछ देर के लिए ठहर सा गया।
सनातन धर्म मंदिर से निकली ‘न्याय यात्रा’, बारात घर में बदली जनसभा में
सनातन धर्म मंदिर और श्री गुरुद्वारा साहिब ग्राउंड से शुरू हुई यह ‘अंकिता भंडारी न्याय यात्रा’ एआईसीसी सदस्य एवं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में निकली।
हाथों में तख्तियां, आंखों में आक्रोश और जुबान पर इंसाफ की मांग — कार्यकर्ता जब प्रेमनगर बारात घर पहुंचे तो माहौल पूरी तरह भावनात्मक हो चुका था।
“वीआईपी और सबूत मिटाने वालों की CBI जांच हो” – सूर्यकांत धस्माना
सभा को संबोधित करते हुए सूर्यकांत धस्माना ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
“अंकिता भंडारी की व्हाट्सऐप चैट में वीआईपी को एक्स्ट्रा सर्विस देने का जिक्र था। रिसॉर्ट भाजपा नेता का था, इसलिए वीआईपी का सत्ता से जुड़ा होना स्वाभाविक शक पैदा करता है।
इसीलिए हम शुरू से कह रहे हैं — CBI जांच हो, वो भी सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में।”
उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की गई, और एसआईटी जांच में वीआईपी को बचाया गया।
धस्माना ने साफ चेतावनी दी:
“जब तक CBI जांच की घोषणा नहीं होती, यह आंदोलन थमेगा नहीं।”
मुख्यमंत्री के बयान पर कांग्रेस का हमला
मुख्यमंत्री के उस बयान पर कि “अंकिता के माता-पिता जो जांच चाहेंगे, वही करवाई जाएगी”, कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया।
धस्माना बोले:
“यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, पूरे उत्तराखंड की महिला अस्मिता से जुड़ा है।
मुख्यमंत्री को जनता की भावनाओं के अनुरूप केंद्र सरकार को CBI जांच की संस्तुति भेजनी चाहिए।”
“सरकार बहरी बनी हुई है” – महानगर कांग्रेस अध्यक्ष गोगी
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने कहा:
“तराई हो या पहाड़, हर जगह अंकिता भंडारी प्रकरण की गूंज है।
पूरा प्रदेश CBI जांच मांग रहा है, लेकिन महिला विरोधी भाजपा सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।”
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी
इस न्याय यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
नारे, आंसू और गुस्से के बीच एक ही सवाल हर चेहरे पर था —
“वीआईपी कौन है?”
🔥 अंतिम पंक्तियाँ
अंकिता अब सिर्फ एक नाम नहीं,
वह उत्तराखंड की बेटियों की आवाज़ बन चुकी है।
सवाल अब सिर्फ न्याय का नहीं,
सच सामने लाने का है।
👉 क्या सत्ता सच का सामना करेगी, या सड़कें यूं ही इंसाफ मांगती रहेंगी?
