हवा में मौतें, ज़मीन पर गुस्सा – कांग्रेस बोली ‘हेलिकॉप्टर नहीं, बम उड़ रहे हैं!’

Share Now

“मौत बनकर बरस रहा है हेलिकॉप्टर!”
चारधाम यात्रा में हादसों पर कांग्रेस का बड़ा हमला – ‘अब नहीं सहेंगे ये खटारा उड़ानें!’


⚠️ हेलिकॉप्टर हादसों पर सियासी भूचाल, कांग्रेस ने सौंपा 6 सूत्रीय ज्ञापन

देहरादून।
चारधाम यात्रा में बार-बार हो रही हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं से सन्नाटे में है उत्तराखंड… और अब आवाज़ बुलंद की है कांग्रेस ने।
प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव आनंद वर्धन को सौंपा छह सूत्रीय ज्ञापन, जिसमें डीजीसीए और एटीसी नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।


🛑 “खटारा हैली अब नहीं चलेगा!” – कांग्रेस अध्यक्ष का तीखा हमला

करण माहरा ने कहा,

🗣️ “चारधाम जैसी पवित्र यात्रा अब मौत की उड़ान बन चुकी है। पिछले सवा महीने में पांच हेलिकॉप्टर हादसे और कई निर्दोष जानें गई हैं। अब बहुत हुआ!”

उन्होंने कहा कि राज्य की उड्डयन नीति बेहद लचर है –

  • ना कोई तय मानक
  • ना उड़ानों का हिसाब
  • ना ही कोई निगरानी
  • और खटारा हेलिकॉप्टरों को खुली छूट!

🌍 “हेलिकॉप्टर अब नहीं, विक्रम टेम्पो बन गए हैं!” – धस्माना का गंभीर आरोप

कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा:

🗣️ “हेली कंपनियां पैसे के लालच में नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। 15 जून की दुर्घटना में भी तय समय से पहले उड़ान भरने से हादसा हुआ। ये उड़ानें अब जनता की जान से खिलवाड़ हैं!”

उन्होंने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन ने हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों को “मनमर्जी की अलिखित छूट” दे रखी है।


🌲 पर्यावरण पर भी संकट – हेलीकॉप्टरों की अंधाधुंध उड़ानों से ग्लेशियर और वन्यजीवों को खतरा!

करण माहरा ने यह भी चेताया कि

🗣️ “हवाई शोर और बेतरतीब उड़ानों से उत्तराखंड के नेशनल पार्क, ग्लेशियर, और वन्य जीव संकट में हैं। ये केवल यात्री सुरक्षा नहीं, बल्कि पर्यावरण की लड़ाई भी है।”


🚙 हिल ड्राइविंग लाइसेंस की मांग, टैक्सी परमिट की विसंगति पर भी सवाल

सड़क हादसों पर भी चिंता जताई गई।

  • चार पहिया चालकों के लिए हिल ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य करने की मांग
  • नैनीताल में स्थानीय टैक्सी परमिट रोके गए, लेकिन बाहरी राज्यों की टैक्सियां दौड़ रहीं – इस पर भी कांग्रेस ने नाराजगी जताई।

📜 छह सूत्रीय मांगें:

  1. DGCA और ATC नियमों का सख़्ती से पालन
  2. खटारा हेलिकॉप्टरों पर पूर्ण प्रतिबंध
  3. पारदर्शी और ठोस राज्य उड्डयन नीति
  4. हिल ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य
  5. टैक्सी परमिट नीति में समानता
  6. पर्यावरणीय प्रभावों की समीक्षा

🔚 अब सवाल यह है – क्या सरकार जागेगी, या फिर किसी अगली उड़ान में कोई और उड़ जाएगा… हमेशा के लिए?

उत्तराखंड की पवित्र भूमि में अब हर उड़ान एक दुआ मांगती है –
“भगवान करे, ये अंतिम लैंडिंग न हो…”


📲 Meru Raibar News – उत्तराखंड की आवाज़, ज़मीन से आसमान तक!


error: Content is protected !!