गंगा किनारे फंसे थे “रामा कृष्णा”… 4 घंटे के खतरनाक ऑपरेशन में पुलिस बनी जीवन रक्षक

टिहरी गढ़वाल।
आध्यात्म की तलाश में निकले कदम… अचानक मौत के साये में फंस गए!
घना जंगल, गहरी खाई, चारों तरफ अंधेरा और जंगली जानवरों का डर—ऐसी खौफनाक रात में एक विदेशी नागरिक और उसका भारतीय साथी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे… तभी टिहरी पुलिस फरिश्ता बनकर पहुंची।
🌌 रात 9 बजे आई मदद की पुकार
17 अप्रैल की रात, करीब 9 बजे—डायल 112 पर एक घबराई हुई कॉल आती है।
मथुरा निवासी आकाश गोस्वामी बताते हैं—
“हम जंगल में भटक गए हैं… कुछ समझ नहीं आ रहा… मदद चाहिए!”
उनके साथ थे 69 वर्षीय विदेशी नागरिक—जॉर्ज लियोन एसेवेडो, जो अब “रामा कृष्णा” के नाम से जाने जाते हैं।
🌲 जंगल, खाई और गंगा का किनारा
लोकेशन ट्रेस हुई—बछेलीखाल से 3 किलोमीटर नीचे, गंगा नदी के पास।
लेकिन रास्ता? कोई साफ रास्ता नहीं… सिर्फ घना जंगल और खतरनाक ढलान!
👮 जब पुलिस बनी उम्मीद की किरण
प्रभारी निरीक्षक प्रशांत बहुगुणा के नेतृत्व में पुलिस टीम तुरंत हरकत में आई।
स्थानीय पूर्व ग्राम प्रधान मुकेश रावत के साथ टीम खाई में उतरी…
हर कदम पर खतरा, हर मोड़ पर अनिश्चितता—लेकिन हौसला नहीं टूटा।
⏳ 4 घंटे की जंग… जिंदगी के लिए
लगातार 4 घंटे तक चला सर्च ऑपरेशन—
बार-बार रास्ता भटकना, अंधेरे में खोजबीन, जंगली जानवरों का डर…
और आखिरकार—
गंगा किनारे फंसे दोनों लोगों को सकुशल ढूंढ निकाला गया!
🧘 “रामा कृष्णा” की कहानी ने छुआ दिल
विदेशी नागरिक जॉर्ज एसेवेडो—जो पिछले 20 साल से भारत में रहकर आध्यात्म को जी रहे हैं—
उन्होंने अपना नाम “रामा कृष्णा” रख लिया है।
उनकी आंखों में राहत और कृतज्ञता साफ झलक रही थी।
“टिहरी पुलिस ने हमें नई जिंदगी दी… ये सच में ‘अतिथि देवो भव’ है।”
🙏 मानवता की मिसाल बनी पुलिस
रेस्क्यू के बाद दोनों को सुरक्षित सड़क तक लाया गया, होटल में ठहराया गया और अगली यात्रा के लिए मदद दी गई।
यह सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं था…
यह था मानवता, साहस और समर्पण का जीवंत उदाहरण।
🔚 एक सोचने वाली बात…
जब अंधेरे, डर और मौत के बीच उम्मीद खत्म हो जाती है…
तब कोई हाथ आगे बढ़ता है—और वही बनता है असली हीरो।
क्या हम भी किसी की मुश्किल घड़ी में ऐसा हाथ बन पाएंगे?
