“आँखें नम… तालियाँ थमने का नाम ना लें: उत्तरकाशी पुलिस परिवार ने मदन सिंह को दी भावभीनी विदाई!”

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सेवा, समर्पण और यादों की झड़ी… 28 साल की बेमिसाल पारी के बाद अनुचर मदन सिंह हुए सेवानिवृत्त, पुलिस परिवार ने गले लगाकर कहा – “आपकी कमी हमेशा खलेगी।”


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उत्तरकाशी पुलिस कार्यालय में आज एक अलग ही माहौल था — आँखें नम थीं, दिल भारी थे, पर तालियाँ गूंज रही थीं। अनुचर श्री मदन सिंह जी के रिटायरमेंट पर उत्तरकाशी पुलिस परिवार ने ऐसा विदाई समारोह किया कि हर किसी की रूह तक भीग गई। 28 साल की कड़ी मेहनत और निस्वार्थ सेवा के बाद, मदन सिंह जी ने पुलिस विभाग को अलविदा कहा।


मुख्य खबर
उत्तरकाशी पुलिस कार्यालय में आयोजित इस विदाई समारोह में पुलिस उपाधीक्षक जनक सिंह पंवार ने श्री मदन सिंह को शॉल, प्रशस्ति पत्र और उपहार भेंट किए। उन्होंने कहा –

“मदन सिंह जी जैसे अनुचर विभाग की रीढ़ होते हैं। उनकी सादगी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता हमें हमेशा प्रेरित करती रहेगी।”

विदाई समारोह में फूलों की मालाएं, गले लगने की बारी-बारी और कैमरों की फ्लैश… सबकुछ बता रहा था कि यह सिर्फ एक कर्मचारी की रवानगी नहीं, बल्कि एक पूरे युग का अंत था।


स्थानीय रंग और भावनात्मक पहलू (Local Color & Emotions):
निरीक्षक यातायात श्री संजय रौथाण ने कहा –

“मदन सिंह जी कभी ‘नहीं’ कहना नहीं जानते थे। उनकी मुस्कान ही हमारी थकान मिटा देती थी।”

वहीं वाचक पुलिस अधीक्षक कोमल रावत और प्रधान लिपिक रणजीत नेगी भी अपनी भावनाएं रोक नहीं पाए। प्रभारी महिला काउंसलिंग सेल श्रीमती गीता ने कहा –

“मदन सिंह जी ने हर कर्मचारी को परिवार जैसा सम्मान दिया। उनके जाने से खालीपन महसूस होगा।”

विदाई समारोह में मदन सिंह जी के परिवारजन भी मौजूद थे। मंच पर खड़े मदन सिंह जी के चेहरे पर मुस्कान तो थी, लेकिन आँखें छलक आईं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा –

“ये विभाग मेरा दूसरा घर था। सबके सहयोग और प्रेम के लिए मैं तहे दिल से आभारी हूँ।”


पृष्ठभूमि (Background):
मूल रूप से जनपद उत्तरकाशी के निवासी श्री मदन सिंह वर्ष 1996 में पुलिस विभाग से जुड़े थे। अपने सरल स्वभाव और कर्मठता के लिए वह सभी के चहेते रहे। हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति सबको भरोसा देती थी कि काम सलीके से होगा।


🔚 क्लोजिंग लाइन 🔚
आज मदन सिंह जी पुलिस वर्दी उतारकर घर लौट रहे हैं, लेकिन उनकी वर्दी पर लगे भरोसे और सम्मान के सितारे हमेशा चमकते रहेंगे।

“कुछ लोग विभाग छोड़ जाते हैं… पर यादें, नाम और मिसालें छोड़ जाते हैं। मदन सिंह जी भी उन्हीं में से एक हैं।”


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