एवरेस्ट पर उत्तराखण्ड का परचम: तीन एनसीसी कैडेट्स की ऐतिहासिक विजय -“16 साल का सचिन बना सबसे युवा विजेता?”

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“एवरेस्ट पर लहराया उत्तराखण्ड का परचम: तीन युवा एनसीसी कैडेट्स ने रचा इतिहास”
Meru Raibar News | 19 मई 2025 | विशेष रिपोर्ट

देहरादून/उत्तरकाशी/पौड़ी:
18 मई 2025 – साहस, दृढ़ निश्चय और अदम्य हौसले का दिन। जब दुनिया की सबसे ऊँची चोटी, माउंट एवरेस्ट, ने उत्तराखण्ड के तीन युवा एनसीसी कैडेट्स के कदमों को चूम लिया।
उत्तराखण्ड के वीर सपूतों –
🔹 कैडेट वीरेन्द्र सामन्त (29 उत्तराखण्ड वाहिनी, देहरादून)
🔹 कैडेट मुकुल बंगवाल (4 उत्तराखण्ड वाहिनी, पौड़ी)
🔹 कैडेट सचिन कुमार (3 उत्तराखण्ड वाहिनी, उत्तरकाशी)
ने ना सिर्फ एवरेस्ट फतह किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जब हौसले बुलंद हों, तो कोई भी शिखर दूर नहीं।

“यह हमारी नहीं, हर सपने देखने वाले युवा की जीत है” – कैडेट वीरेन्द्र सामन्त
कठिन परिस्थितियों, बर्फीली हवाओं और ऑक्सीजन की कमी के बीच, इन तीनों युवाओं ने ना केवल स्वयं को साबित किया, बल्कि पूरे देश को गौरवांवित किया।

यह ऐतिहासिक अभियान राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) द्वारा आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और साहसिक खेलों के प्रति रुचि जगाना है।

🏔️ साधारण परिवार से विशेष उपलब्धि तक – सचिन कुमार की अद्भुत कहानी

उत्तरकाशी के ग्राम दड़माली, पोस्ट पुजारगांव धनारी तहसील डुंडा निवासी, सचिन कुमार, जो पीएम श्री राजकीय आदर्श कीर्ति इंटर कॉलेज, उत्तरकाशी में कक्षा 12 के छात्र हैं, ने महज़ 16 वर्ष की आयु में एवरेस्ट फतह कर इतिहास रच दिया।
सचिन इससे पहले माउंट अभिगामिन (7355 मी.) और सियाचिन ग्लेशियर पर भी सफल आरोहण कर चुके हैं। सीमांत जनपद उत्तरकाशी और उनके विद्यालय परिवार को इस गौरवशाली उपलब्धि पर हार्दिक बधाई।

🗣️ “नेतृत्व कठिन समय में ही जन्म लेता है” – मेजर जनरल रोहन आनंद

उत्तराखण्ड एनसीसी के अपर महानिदेशक, मेजर जनरल रोहन आनन्द (सेना मेडल) ने कहा,

“इन युवाओं ने साहस, अनुशासन और टीमवर्क का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। यह सफलता सिर्फ तीन कैडेट्स की नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र की है।”

इस साहसिक मिशन में उन्हें अनुभवी पर्वतारोहियों, भारतीय सेना, उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड और स्थानीय संगठनों का भी भरपूर सहयोग मिला।

🌟 स्वागत सच्चे नायकों जैसा होगा

अब जब ये कैडेट्स उत्तराखण्ड लौटेंगे, तो उन्हें एक सच्चे नायक की तरह सम्मानित किया जाएगा।
उनका यह सफर, यह उपलब्धि, और यह जुनून – हर युवा के लिए एक संदेश है:
“अगर ठान लो, तो कोई भी सपना बड़ा नहीं होता।”

Meru Raibar News की ओर से इन तीनों साहसी योद्धाओं को शत-शत नमन।
आपने उत्तराखण्ड का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया है।


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