🌄 लोक संस्कृति की खुशबू से महका मलेथा!
गढ़वाली परिधान, लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजनों के संग बच्चों ने मनाया लोक संस्कृति दिवस
मलेथा | 24 नवंबर 2025
जब नन्हे हाथों में थाली और मन में अपनी माटी का गर्व हो—
तो समझिए लोक संस्कृति ज़िंदा है।
राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय मलेथा में लोक संस्कृति दिवस कुछ इसी भावना के साथ पूरे उल्लास और आत्मीयता से मनाया गया।
🌺 इंद्रमणि बड़ोनी को नमन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्रधानाध्यापक वीरेंद्र बिष्ट ने
उत्तराखंड के गांधी, स्व. इंद्रमणि बड़ोनी की प्रतिमा पर
माल्यार्पण और पुष्प अर्पण कर की।
विद्यालय परिसर श्रद्धा और सम्मान से गूंज उठा।
👘 गढ़वाली वेश में सजे बच्चे, संस्कृति का जीवंत चित्र
इस दिन विद्यालय के सभी छात्र-छात्राएं और शिक्षक
गढ़वाली परिधानों में नजर आए।
मानो पूरा स्कूल एक चलता-फिरता लोक संग्रहालय बन गया हो।
🗣️ बड़ोनी जी के विचारों से मिली नई दिशा
शिक्षकों ने बच्चों को बताया—
कैसे इंद्रमणि बड़ोनी जी ने उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए
संघर्ष किया और जन-जन को जोड़ा।
एक शिक्षक ने भावुक स्वर में कहा—
“अगर भाषा और संस्कृति बची, तभी पहाड़ बचेगा।”
💃 गढ़वाली गीतों पर नन्हे कदमों का उत्सव
लोक गीतों की धुन पर बच्चों ने
गढ़वाली नृत्य प्रस्तुतियां दीं।
तालियों की गूंज ने यह जता दिया कि
संस्कृति सिर्फ किताबों में नहीं,
बच्चों की मुस्कान में भी बसती है।
🍚 स्वाद में भी संस्कृति—पारंपरिक भोज
कार्यक्रम का सबसे यादगार पल रहा—
विशेष गढ़वाली भोज
जिसमें बच्चों को मिला—
- चैसा
- झंगोरे की खीर
- आलू की सब्जी
- चावल (पीएम पोषण योजना के अंतर्गत)
हर निवाले में पहाड़ की पहचान।
👩🏫 शिक्षक और भोजनमाताओं की अहम भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में
सहायक अध्यापक अनिल लिंगवाल, नीरज कुमार प्रेमी
और विद्यालय की भोजनमाताओं का विशेष योगदान रहा।
🔚 अंत में एक भाव…
जब बच्चे अपनी बोली बोलें,
अपना पहनावा पहनें
और अपनी थाली में अपनी मिट्टी का स्वाद पहचानें—
तो समझिए लोक संस्कृति सुरक्षित हाथों में है।
**मलेथा के इन नन्हे कदमों ने
आज पूरे उत्तराखंड को याद दिलाया—
पहचान बचानी है, तो शुरुआत बचपन से करनी होगी।
