इंटरनेट की तलाश मे तीन किमी दूर जंगल मे ऑनलाइन पढ़ाई के लिए जाने की मजबूरी

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एक दौर था जब पहाड़ो से लोग बच्चो के बेहतर पढ़ाई के लिए पहाड़ उतर कर मैदानो का रुख कर रहे थे , अब कोरोना महामारी के खौफ से महानगरो मे गए प्रवासी वापस अपने ग्गव लौट आए है किन्तु अपने बच्चो की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए उन्हे गाव मे नेटवाओर्क नहीं मिलने पर तीन किमी दूर जंगल मे बच्चो को भेजना पड़ रहा है| ऐसे मे गुलदार, भालू समेत कई ज्नगली हिंसक जानवरो से अपने बच्ची की चिंता मे ग्रामीण अपनी शिकायत लिए नेताओ और अधिकारियों के चक्कर काट रहे है |

डिजीटल इंडिया के सपने देखने वालों के लिए ये बड़ी खबर है जी हाँ पहाड़ के कई दुरस्त गाँव के नोनिहाल कोविड 19 के समय में किस तरह से अपनी पढाई कर रहे है इसकी एक बानगी यहाँ देखी जा सकती है,सीमांत प्रखण्ड जोशीमठ के सबसे सुदूरवर्ती गाँव मोल्टा में संचार सुविधा ठप होने से यहाँ के नौनिहालों को ओंन लाईन पढाई लिखाई सहित मासिक परीक्षा देने में भारी दिक्कतें हो रही है,डिजिटल इंडिया के युग में आज भी मोल्टा गाँव के स्कूली बच्चे हर दिन गाँव से 3 किलोमीटर दूर बीहड़ जंगलों मैं नेटवर्क छेत्र ढूंढ कर जंगलो में खुले में बैठ कर अपनी ओनलाईन गृह कार्य और मासिक टेस्ट पेपर देने को मजबूर है, आप इन तस्वीरों में देख खुद अंदाजा लगा सकते है की यहाँ आखिर विकास की किरण कबतक पहुुंचेगी, सरकार चाहे लाख दावे करे लेकिन आज के समय की जरूरी सुविधा संचार व्यवस्था यहाँ नही है तो ग्रामीण किसे आवाज दें,क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और राजनेतिक दलों के सुरमाओं को मोल्टा गाँव की याद सिर्फ हर पांच साल के चुनावों में ही आती है बाकी यहाँ की सुध लेने वाला कोई नहीं है,तो ऐसे में केसे होगा मेरा पहाड़ डिजीटल,

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