पौराणिक पद्धति से आयुष करेगा करेगा बीमारी का जड़ से इलाज – प्रशिक्षण सुरु

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पिथौरागढ़: एएनएम व आशा वर्कर को आयुर्वेद और योग से बीमारियों को दूर करने हेतु प्रशिक्षण दिया गया

मधुमेह, उच्च रक्तचाप व हृदय से संबंधित विभिन्न बीमारियों आदि की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत जिला भर की एएनएम व आशा वर्कर के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में आयुष विभाग द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में मूनाकोट की 130 और विण ब्लॉक की 170 आशा वर्कर और एएनएम को विभिन्न बीमारियों के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के उपरान्त एएनएम व आशा वर्कर अपने को आबंटित ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम वासियों को विभिन्न बीमारियों से बचाव व प्राथमिक उपचार के तौर तरीकों से अवगत करवाएंगी। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ एच सी पंत ने प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन करते हुए कहा कि आयुष विभाग घरेलू व हमारी प्राचीन पद्धतियों के माध्यम से आज के समय में फैल रही विभिन्न बीमारियों पर अंकुश लगाने के लिए अभियान चला रहा है। इस अभियान के सार्थक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने दिनचर्या को ठीक करते हुए हमारे पूर्वजों द्वारा बताई गई विभिन्न पद्धतियों का अनुशरण करे तो अनेक प्रकार की बीमारियों से हम बच सकते हैं।

योग अनुदेशकों की नियुक्ति हेतु 15 मार्च को वाक इन इंटरव्यू: डॉ राजेश जोशी

जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. राजेश जोशी ने बताया कि आयुष्मान भारत के अंतर्गत संचालित हेल्थ एन्ड वेलनेस केंद्रों में योग अनुदेशकों की नियुक्ति हेतु 15 मार्च को वाक इन इंटरव्यू आयोजित किया जा रहा है, उन्होंने आयुर्वेद विभाग द्वारा चलाई जा रही गतिविधियां सराहनीय है, जिनके परिणाम धरातल पर दिख रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आई एएनएम व आशा वर्करों को डा. जोशी ने राष्ट्रीय आयुष मिशन में आयुष के वर्तमान स्तर पर प्रकाश डालते हुए विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया।

प्रशिक्षक डा. बालम सिंह बोरा ने आयुर्वेद के माध्यम से बेहतर जीवन जीने के तरीकों व डॉ. होशियार सिंह बोरा ने औषधियों पौधों और उनके इस्तेमाल के तरीकों पर महत्वपूर्ण जानकारियां दी। डा. कंचन सूंठा ने मधुमेह से बचाव व खराब खानपान से होने वाली विभिन्न बीमारियों से बचाव के उपाय बताए। कार्यशाला में आयुष मिशन के डॉ नीरज कोहली ने आशा व एएनएम को अनुशासन और विषय वस्तु पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी की चिकित्सा पद्धतियां प्राचीनतम हैं। हम सभी को इनका खोया हुआ सम्मान वापस लाना है। आयुष हेल्थ वेलनेस केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ अवनीश उपाध्याय द्वारा जन स्वास्थ्य एवं बीमारियों विशेषकर मधुमेह के बचाव में आयुष विधाओं की उपयोगिता को दृष्टिगत रखते हुए आशा व एएनएम संवर्ग को जन मानस में प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के बारे में जागरूक करने का निर्णय लिया गया है। प्रशिक्षण के तहत इन्हें आहार-विहार, जीवन शैली, आम बीमारियों एवं उनके घरेलू उपचार, आयुर्वेद एवं योग में स्वास्थ्य की अवधारणा, मधुमेह की रोकथाम एवं नियंत्रण, सामान्य औषधीय पौधों एवं इनके उपयोग की जानकारी दी जाती है।

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