🔴 देवरा यात्रा में बवाल! धर्म की आड़ में अराजकता पर प्रशासन सख़्त
अगस्त्यमुनि |
श्रद्धा, परंपरा और आस्था के प्रतीक महर्षि अगस्त्य मुनि महाराज की ऐतिहासिक देवरा यात्रा उस वक्त विवादों में घिर गई, जब कुछ अराजक तत्वों ने धार्मिक परंपरा की आड़ लेकर कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती दे डाली।
सरकारी संपत्ति को नुकसान, अधिकारियों से अभद्रता और NH-107 पर 3–4 घंटे का जाम—घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया।

⚠️ जिलाधिकारी का सख़्त संदेश
“धर्म के नाम पर अराजकता किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी” – जिलाधिकारी
जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि देवरा यात्रा के लिए सभी व्यवस्थाएं पहले से तय थीं, पारंपरिक मार्ग पर प्रशासन ने हर जरूरी इंतज़ाम किए थे।
इसके बावजूद कुछ लोगों ने क्रीड़ा भवन का मुख्य गेट तोड़ दिया, जबरन मार्ग बदलने का दबाव बनाया और प्रशासनिक अधिकारियों से दुर्व्यवहार किया।
🚨 हाईवे जाम, आम जनता बेहाल
घटना के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग-107 पूरी तरह बाधित रहा।
स्थानीय नागरिक, तीर्थयात्री और पर्यटक घंटों फंसे रहे।
श्रद्धा के नाम पर फैली इस अव्यवस्था ने लोगों में गुस्सा और चिंता दोनों पैदा कर दी।
📁 ‘रिपीटेटिव ऑफेंडर्स’ पर कड़ा एक्शन
प्रशासन ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए निर्देश दिए हैं कि:
- शामिल अराजक तत्वों की पहचान की जाए
- गुंडा एक्ट सहित सभी सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज हो
- सरकारी काम में बाधा और संपत्ति क्षति के मामलों में सख़्त कार्रवाई हो
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कानून तोड़ने वालों के साथ कोई नरमी नहीं होगी, चाहे वह किसी भी आड़ में क्यों न हों।
🛕 प्रशासन की पूरी तैयारी थी
देवरा यात्रा के लिए:
- पारंपरिक मार्ग पर साफ-सफाई
- रास्तों को समतल करने की व्यवस्था
- श्रद्धालुओं की सुविधा
- सुरक्षा और यातायात नियंत्रण
सब कुछ पहले से सुनिश्चित किया गया था, ताकि यात्रा शांति और मर्यादा के साथ सम्पन्न हो सके।
📢 जनता से अपील
जिला प्रशासन ने जनपदवासियों से अपील की है कि:
- धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखें
- अफवाहों से दूर रहें
- प्रशासन का सहयोग करें
🔚 अंतिम सवाल
क्या आस्था का मतलब कानून तोड़ना है?
या फिर परंपराओं की रक्षा, शांति और अनुशासन से ही सच्ची श्रद्धा साबित होती है?
👉 प्रशासन का संदेश साफ है—धर्म रहेगा, पर अराजकता नहीं।
