बड़े बाबू नही बनेंगे अब तहसीलदार मजिस्ट्रेट।
प्रदेश के सचिव स्तर के अधिकारियों के फैसले का जब मजाक बनने लगा तो वापस जिलों में तैनात डीएम के विवेक पसर फैसला छोड़ कर सरकार ने अपनी छेचेलेदारी होने से खुद को बचा लिया है।

भूलेख कर्मचारी संघ के विरोध की खबर मेरु रैबार द्वारा प्रमुख रूप से प्रकाशित और प्रसारित किए जाने के बाद आम लोगो की प्रतिक्रिया को देखते हुए शासन ने अपने निर्यण को वापस ले लिया है।
गिरीश गैरोला
तहसीलों में कार्यरत मुख्य प्रशासनिक अधिकारी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को तहसीलदार नायब तहसीलदार कार्य आवंटन के संबंध में जारी शासनादेश को आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद उत्तराखंड सरकार ने वापस ले लिया है। गौरतलब है की मेरु रेबार ने इस समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित, प्रसारित किया था जिसके बाद सोशल मीडिया पर आम लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई थी, जिसको संज्ञान लेकर आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद उत्तराखंड देहरादून ने अपने पत्रांक, 10522/6-133(2017-18) दिनांक 24 मार्च 2021 को प्रदेश के सभी जिला अधिकारियों को लिखे गए पत्र में कहां है की तहसीलों में कार्यरत मुख्य प्रशासनिक अधिकारी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को तहसीलदार नायब तहसीलदार की अनुपस्थिति में तहसील कार्यालयों से संबंधित केवल नित्य प्रति के कार्य न्यायिक कार्यों को छोड़कर संपादित करने के जो आदेश निर्गत किए गए हैं ,परिषद द्वारा समुचित विचारों प्रांत उपरोक्त निर्गत आदेश दिनांक 9 फरवरी 2021 को निरस्त करते हुए जनपद के जिला अधिकारियों द्वारा अपने स्तर व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है।
इससे पहले राजस्व परिषद् ने तहसील स्तर पर काम करने वाले बड़े बाबुओ को नायब तहसीलदार / तहसीलदार के पदों पर तैनात करने के आदेश दिए थे, जिसका पटवारी [ भुलेख कर्मचारी संघ } ने खुलकर विरोध किया था दो दिन कलम बंद हड़ताल के बाद एक अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल कि भी चेतावनी दी थी
