कोरोना टेस्टिंग फर्जीवाड़े के मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, जमानत नहीं मिली

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हल्द्वानी। हाईकोर्ट नैनीताल ने कुम्भ मेले के दौरान कोरोना टेस्टिंग फर्जीवाड़े के मामले में सुनवाई करते हुए मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज के सर्विस पार्टनर शरत पंत, मलिका पंत और नलवा लैब के आशीष वशिष्ठ की ओर से दायर तीन अलग-अलग जमानत प्रार्थना पत्रों पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई की। तीनों में से किसी को भी जमानत नहीं मिल सकी।
कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 24 मार्च की तिथि नियत करते हुए तब तक सरकार को केस डायरी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ में हुई। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि इनके द्वारा फर्जी टेस्टिंग की गई है, जिसके ऐवज में सरकार को 4 करोड़ रुपये का बिल भी दिया गया। इसका विरोध करते हुए मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज के सर्विस पार्टनर के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल द्वारा कोई फर्जी टेस्टिंग नहीं की गई, वे तो मात्र सर्विस एजेंसी थे। जो टेस्ट किए गए वे लालचंदानी और नलवा लैब द्वारा किए गए। नलवा लैब ने एक लाख चार हजार दो सौ सत्तावन और लालचंदानी लैब ने तेरह हजार टेस्ट किए। सरकार जांच में एक भी टेस्ट फर्जी साबित नहीं कर पाई। कोर्ट ने पूर्व में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। उसके बाद मामले के विवेचना अधिकारी ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 467 और बढ़ा दी। जिसमें उनकी कोई भूमिका ही नहीं है। आरोपी शरत पंत, मलिका पंत और आशीष वशिष्ठ ने जमानत प्रार्थना पत्र दायर कर कहा कि वे मैक्स कॉर्पाेरेट सर्विसेस में एक सर्विस प्रोवाइडर हैं। परीक्षण और डेटा प्रविष्टि के दौरान मैक्स कॉर्पाेरेट का कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। यह सारा काम स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी में किया गया था। इन अधिकारियों की मौजूदगी में परीक्षण स्टॉलों के कार्य को अपनी मंजूरी दी गई थी। अगर कोई गलत कार्य कर रहा था तो कुंभ मेले के दौरान अधिकारी चुप क्यों रहे।

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