🚨 गुलदार की आहट, प्रशासन अलर्ट!
देहरादून | 20 दिसंबर 2025 |
शाम ढलते ही सन्नाटा…
खेतों के पास डर…
और स्कूल जाते बच्चों की आँखों में खौफ।
मानव-वन्यजीव संघर्ष अब सिर्फ जंगल की कहानी नहीं रहा—
यह देहरादून के रिहायशी इलाकों की हकीकत बन चुका है।
और अब इस खतरे से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है।

🛑 मुख्यमंत्री के निर्देश, डीएम सविन बंसल की सख्ती
मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में
जिलाधिकारी सविन बंसल ने ऋषिपर्णा सभागार में
वन, पुलिस, राजस्व, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन विभाग के साथ
उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
डीएम ने दो टूक कहा—
“मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर चुनौती है।
एक भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।”
🚨 अब सूचना पर नहीं, तुरंत कार्रवाई होगी
डीएम ने आदेश दिया—
➡️ त्वरित रिस्पॉन्स ग्रुप (QRT) का गठन
➡️ CMO, पुलिस, वन, राजस्व और आपदा प्रबंधन शामिल
➡️ सूचना मिलते ही टीम तुरंत मौके पर पहुँचेगी
मकसद साफ—
जनहानि भी न हो, और वन्यजीवों को भी नुकसान न पहुँचे।
🔊 हाईटेक हथियार: जंगल की खामोशी तोड़ेगा अलर्ट सिस्टम
संवेदनशील और रिहायशी क्षेत्रों में
अब जंगल के खतरे से निपटने को
आधुनिक तकनीक उतारी जाएगी।
✔️ सेंसर्स आधारित तेज आवाज करने वाले उपकरण (एनाइडर)
✔️ सोलर लाइट
✔️ हाई-रेजोल्यूशन कैमरे
✔️ फोकस लाइट
👉 डीएम ने मौके पर ही बजट स्वीकृत कर दिया।
🚓 गश्त बढ़ेगी, मैनपावर और वाहन भी
डीएम ने वन विभाग को निर्देश दिए—
➡️ संवेदनशील क्षेत्रों में 24×7 गश्त
➡️ अतिरिक्त मैनपावर
➡️ अतिरिक्त वाहन
“नियमित गश्त से घटनाओं को पहले ही रोका जा सकता है।”
— डीएम सविन बंसल
🎒 होरावाला में गुलदार का डर, स्कूल टाइम बदलेगा
सहसपुर ब्लॉक के
राईका होरावाला क्षेत्र में
गुलदार की गतिविधियों से बच्चों में दहशत।
➡️ छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए
➡️ स्कूल समय में बदलाव के निर्देश
यह फैसला अभिभावकों के लिए राहत की खबर बना।
📊 आंकड़े जो खतरे की गंभीरता बताते हैं
डीएफओ ने बैठक में बताया—
🌲 देहरादून में 84,059 हेक्टेयर वन क्षेत्र
💰 2010–2025 तक
- मानव मृत्यु मामलों में ₹91 लाख मुआवजा
- घायल मामलों में ₹17 लाख
- फसल क्षति में ₹85.58 लाख
📍 वर्ष 2025 में अब तक—
⚠️ 4 मौतें
⚠️ 8 लोग घायल
🌿 क्या किया जा रहा है अब तक?
✔️ सोलर फेंसिंग
✔️ हाथी रोधी सुरक्षा खाई
✔️ जन जागरूकता अभियान
✔️ वन्यजीव आवास सुधार
लेकिन कमी—
❌ उपकरण
❌ मैनपावर
❌ वाहन
➡️ डीएम ने सभी मांगों को मंजूरी दी।
✍️ अंत में एक सवाल…
जब जंगल शहर की ओर बढ़ रहा हो,
तो क्या सिर्फ डर काफी है?
या फिर तैयारी, तकनीक और त्वरित कार्रवाई ही असली सुरक्षा है?
देहरादून प्रशासन ने संदेश साफ कर दिया है—
अब हर आहट पर प्रशासन तैयार है।
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