कोरोना ने सिखाया खानपान मे ही छिपी है रोग प्रतिरोधक क्षमता का मंत्र -इंडिया बुक ऑफ रिकाडर्स होल्डर, ऑर्थोपीडिक एवं स्पाइन सर्जन डॉ. गौरव संजय

Share Now

देहरादून। संजय ऑर्थोपीडिक स्पाइन एवं मैटरनिटी सेंटर, जाखन, देहरादून के इंडिया बुक ऑफ रिकाडर्स होल्डर, ऑर्थोपीडिक एवं स्पाइन सर्जन डॉ. गौरव संजय ने एक बेबीनार आयोजन के दौरान बताया कि कोरोना वायरस महामारी ने पूरी दुनिया की सोच को बदल दिया है क्योंकि कोरोना वायरस के बाद दुनिया जैसी पहले थी, वैसी आज नहीं है, और जैसी आज है, वैसी भविष्य में नहीं होगी। कोरोना महामारी ने इस बात को फिर से साबित कर दिया है कि यद्यपि हम सब लोग एक घर और घर के बाहर परिचित और अपरिचित एक ही वातावरण में बहुतों के साथ रहते हैं लेकिन घर के कुछ सदस्यों को इसका संक्रमण होता है और कुछ को नहीं। जिनको संक्रमण होता है उनमें कुछ तो ठीक हो जाते हैं और कुछ अच्छे इलाज के बावजूद जैसा कि आपने पहले भी मास मीडिया में पढ़ा ही होगा, कि उनकी मौत हो जाती है। डॉ. गौरव संजय ने रोग प्रतिरोधक क्षमता के विषय में आयोजित बेबीनार के दौरान एक प्रश्न उठाया कि यहाँ पर सोचने वाली बात यह है कि ऐसा क्यों होता है? यदि आप गौर से इनमें से यदि कुछ मरीजों का अवलोकन करें तो पाएंगे कि जिनमें प्रतिरोधक क्षमता कम होती है वही इस बीमारी के शिकार ज्यादा होते हैं।
डॉ. गौरव ने बेबीनार के दौरान कहा कि हमारा शरीर अपने वातावरण में फैले हुए करोडों प्राकृतिक सूक्ष्म जीव और मानव-निर्मित टॉक्सिन से हर समय लड़ता रहता है और जिन लोगों में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है वही इस बीमारी के शिकार ज्यादा होते हैं। साधारण तौर से हिमोग्लोबिन, टी-लिम्फोसाइटस, प्रोटीन और साधारण खून की जांच से पता लगाया जा सकता है कि प्रतिरोधक क्षमता कितनी है। यहाँ पर मैं यह बताना आवश्यक समझूगा कि वैज्ञानिक शोधों के अनुसार प्रतिरोधक क्षमता शरीर में अपने आप नहीं बनती बल्कि यह खान-पान पर निर्भर होती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में प्रोटीन का बहुत बड़ा योगदान है और इसके अतिरिक्त विटामिन और मिनरल्स जैसे माइक्रोन्यूट्रिएन्टस का महत्वपूर्ण योगदान है। यह सब माइक्रोन्यूट्रिन्स (लौह तत्व, कैल्सियम, जस्ता, सैलेनियम, मैग्नीशियम, विटामिन बी2, बी 6, बी 12, ए, डी, ई, के एवं फॉलिक एसिड) हमारे आहार में मिलते हैं। रोजमर्रे में नियमित रूप से संतुलित एवं भरपूर आहार, शारीरिक कार्य, 8 घंटे की पर्याप्त निंद्रा, हरे पत्तेदार सब्जियाँ एवं ताजे फलों को खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। डॉ. गौरव संजय ने बताया कि मेरा मानना है कि जहाँ तक हो सके हम सबको एक केला (जो कि ऊर्जा एवं मैग्नीशियम का सबसे अच्छा स्रोत है), एक नींबू ( प्रचुर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है), एक अण्डा (शरीर के लिए आवश्यक लगभग सभी चीजें पायी जाती हैं), एक ग्रीन टी (एंटीऑक्सीडेंट), एक पत्तेदार हरी सब्जी (प्रचुर मात्रा में लौह तत्व, कैल्सियम, मैग्नीशियम पाया जाता है) एवं एक ताजा फल (फाइबर, फॉलिक एसिड एवं विटामिन सी) का उपयोग हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। यदि इसके साथ एक घंटे नियमित योग करते हैं तो यह सोने में सुहागा का काम करता है। ठीक ही कहा गया है कि जैसा खाओगे वैसा बनोगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!