देहरादून। जूनोटिक रोगों की शीघ्र पहचान, रोकथाम और नियंत्रण हेतु वन हेल्थ निगरानी का सुदृढ़ीकरण सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान (एस.एस.जे.जी.आई.एम.एस. एंड आर.), अल्मोड़ा के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग तथा राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय जूनोटिक रोग रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत स्थापित सेंटिनल सर्विलांस साइट फॉर जूनोज द्वारा एक दिवसीय तकनीकी व व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ संस्थान के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) जी. एस. तितियाल द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
प्राचार्य प्रो. (डॉ.) जी. एस. तितियाल ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पर्वतीय एवं वनाच्छादित क्षेत्रों में जूनोटिक बीमारियां (पशुओं व पक्षियों से मनुष्यों में फैलने वाले संक्रामक रोग जैसे स्क्रब टाइफस, रेबीज, ब्रुसेलोसिस, लेप्टोस्पायरोसिस आदि) जनस्वास्थ्य के लिए निरंतर चुनौती बनी रहती हैं। उन्होंने जोर दिया कि वन हेल्थ (मानव, पशु एवं पर्यावरण स्वास्थ्य का समन्वित दृष्टिकोण) को अपनाकर ही इन बीमारियों की समय रहते पहचान, रोकथाम और प्रभावी नियंत्रण संभव है। उन्होंने संस्थान के सभी चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों को सक्रिय निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए प्रेरित किया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश पुनेरा ने अस्पताल की ओपीडी एवं आईपीडी में आने वाले संदिग्ध मरीजों के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान, समय पर जांच व मानकीकृत उपचार प्रोटोकॉल के पालन के निर्देश दिए। कार्यशाला के विभिन्न वैज्ञानिक व तकनीकी सत्रों में विषय विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत व्याख्यान व प्रशिक्षण प्रदान किया गया। नोडल अधिकारी एवं सहायक प्राध्यापक (माइक्रोबायोलॉजी) डॉ. विक्रांत नेगी ने सेंटिनल सर्विलांस साइट अल्मोड़ा की गतिविधियों एवं कुमाऊं मंडल में जूनोटिक रोगों के आंकड़ों, रुझानों व कार्ययोजना की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ने ओपीडी एवं भर्ती मरीजों में मानक केस डेफिनिशन लागू करने और रोगों की शीघ्र पहचान पर जानकारी दी। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. अंशुल ममगाईं ने डिटेक्ट, रिपोर्ट, रिस्पॉन्ड की रणनीति पर व्याख्यान दिया। डॉ. रवि सैनी (मॉडरेटर) के निर्देशन में सर्विलांस साइट स्टाफ कविता एवं प्रिया द्वारा केस रिकॉर्ड फॉर्म भरने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। रक्त केंद्र प्रभारी डॉ. आशीष जैन ने सुरक्षित सैंपल कलेक्शन, पैकेजिंग, स्टोरेज व कोल्ड-चेन ट्रांसपोर्टेशन के प्रोटोकॉल समझाए। डॉ. रजत प्रकाश ने आउटब्रेक के समय स्वास्थ्य कर्मियों के संक्रमण नियंत्रण एवं व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों पर प्रकाश डाला। कार्यशाला का संचालन मेडिकल सोशल वेलफेयर ऑफिसर हेम बहुगुणा द्वारा किया गया उन्होंने महामारी विज्ञान के सामाजिक पक्षों पर मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर डॉ. उर्मिला पलड़िया, डॉ. एम. अनुराधा, डॉ. अमित आर्य, डॉ. नौशीन, आईडीएसपी से एपिडेमियोलॉजिस्ट नरेंद्र तथा माइक्रोबायोलॉजिस्ट अभिषेक मेहरा सहित मेडिकल कॉलेज के विभिन्न क्लीनिकल विभागों के संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर्स, नर्सिंग अधिकारी व प्रयोगशाला प्राविधिक उपस्थित रहे। कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों का प्री व पोस्ट-टेस्ट मूल्यांकन किया गया, इंटरैक्टिव केस डिस्कशन आयोजित हुए तथा सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।