देहरादून में अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन: AI के साथ स्वास्थ्य क्रांति पर मंथन, 300+ शोधार्थियों की भागीदारी

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स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय बना अंतरराष्ट्रीय ज्ञान संगम — योग, आयुर्वेद और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अनोखा मेल


देहरादून।
जब परंपरा ने तकनीक का हाथ थामा… तो देहरादून बना एक नई सोच का केंद्र! स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग सम्मेलन ने न सिर्फ ज्ञान का आदान-प्रदान किया, बल्कि स्वास्थ्य के भविष्य की दिशा भी तय कर दी।

दो दिवसीय इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से आए 300 से अधिक शोधार्थियों, विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर इसे एक ऐतिहासिक मंच बना दिया।


🌿 परंपरा और तकनीक का संगम

“योग, आयुर्वेद, पारंपरिक ज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” — ये सिर्फ विषय नहीं, बल्कि एक नई स्वास्थ्य क्रांति का संकेत था।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, और इसके साथ ही शुरू हुआ विचारों का महासंगम।


🧠 AI के साथ स्वास्थ्य का भविष्य

अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार भारद्वाज ने साफ कहा—

“योग और आयुर्वेद केवल इलाज नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। अब समय है इन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने का।”

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वास्थ्य सेवाओं को सटीक, तेज़ और हर व्यक्ति तक पहुंचाने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।


🧘 योग: ज्ञान नहीं, अनुभव है!

विशिष्ट अतिथि सोमवीर आर्या ने युवाओं को झकझोरते हुए कहा—

“योग किताबों में नहीं, अभ्यास में मिलता है। नियमित साधना ही असली शक्ति है।”

उनके शब्दों ने छात्रों के भीतर एक नई ऊर्जा भर दी।


🌍 भारत की विरासत, दुनिया की जरूरत

संस्था के सचिव बालकृष्ण चमोली ने गर्व के साथ कहा—

“योग और आयुर्वेद हमारी पहचान हैं, लेकिन अब ये पूरी दुनिया की आवश्यकता बन चुके हैं।”

उन्होंने जोर दिया कि इन विधाओं को हर घर तक पहुंचाना समय की मांग है।


9 साल की बच्ची ने लूटी महफिल

कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पल तब आया जब 9 वर्षीय हर्षिका रिखारी ने मंच पर योग की अद्भुत प्रस्तुति दी।
उसकी लचक, संतुलन और आत्मविश्वास ने सभी को स्तब्ध कर दिया—तालियों की गूंज देर तक थमती नहीं दिखी।


🎭 संस्कृति और विज्ञान का शानदार संगम

विद्यार्थियों ने योग और आयुर्वेद पर आधारित सांस्कृतिक और वैज्ञानिक प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत बना दिया। हर प्रस्तुति में परंपरा की गहराई और आधुनिक सोच की चमक साफ झलक रही थी।


🎤 शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम का संचालन डॉ. आदित्य पंवार, रूपाली बरमोला, डॉ. कपिल और डॉ. मानस वर्मा ने किया।
इस मौके पर कई वरिष्ठ शिक्षाविद और गणमान्य लोग मौजूद रहे, जिन्होंने आयोजन को और गरिमा दी।


🔚 अंत नहीं, एक नई शुरुआत

सम्मेलन का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, लेकिन इसके संदेश लंबे समय तक गूंजते रहेंगे।

👉 सवाल यह है:
जब योग और AI साथ आ सकते हैं… तो क्या हम भी अपने जीवन में परंपरा और तकनीक का संतुलन बना पाएंगे?

यही संतुलन ही भविष्य की असली शक्ति है।

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