सीमावर्ती इलाकों में सड़क, संचार, सुरक्षा का मुद्दा – “देश की सीमाएं सिर्फ फौज नहीं, सुविधाओं से भी मजबूत होती हैं!”

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🏔️ सीमाओं से संसद तक: मुख्यमंत्री धामी ने उठाई उत्तराखंड की आवाज़!

🧭 ग्लेशियर सेंटर से लेकर साहसिक खेल प्रशिक्षण तक — उत्तराखंड को बनाया जाए ‘हिमालयन हीरो’!


वाराणसी में जब देश के बड़े नेताओं की बैठक चल रही थी, तब उत्तराखंड की आवाज़ वहां सबसे बुलंद थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वो कहा जो हर पहाड़ी दिल कब से सुनना चाहता था — “उत्तराखंड सिर्फ पहाड़ नहीं, सुरक्षा की दीवार है। इसे मजबूत करना वक्त की ज़रूरत है।”


🌐 धामी बोले – सरहदें मजबूत हों, तभी देश सुरक्षित होगा!

25वीं मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने सीमांत क्षेत्रों की हकीकत को पूरे देश के सामने रखा। बोले –

“जहां फौजी खड़ा है, वहां सड़क और नेटवर्क भी खड़ा होना चाहिए।”

सीमा पर 4G, भारत नेट, और सैटेलाइट संचार सेवाओं की मांग की गई, ताकि सेना और ग्रामीण, दोनों जुड़े रहें।


🏔️ ‘वाइब्रेंट विलेज’ नहीं, ‘वाइब्रेंट उत्तराखंड’ चाहिए!

सीमा पर बस्तियां खाली हो रही हैं, पलायन जारी है। मुख्यमंत्री ने वाईब्रेंट विलेज प्रोग्राम को तेज़ी से लागू करने और सीमा सड़क संगठन (BRO) से ज्यादा सहयोग की मांग रखी।

“पलायन रोकना है, तो लोगों को वहीं रोज़गार, संचार और सुविधा देनी होगी।”


🧊 ग्लेशियर सेंटर से लेकर ‘स्पिरिचुअल ज़ोन’ तक – नई सोच का रोडमैप

उत्तराखंड में हिमालय के संरक्षण और शोध के लिए ग्लेशियर स्टडी सेंटर की मांग। साथ ही जैव विविधता संस्थान और इंटरनेशनल एडवेंचर स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना के लिए केंद्र से मदद मांगी।

“जब साहसिक पर्यटन बढ़ेगा, तो युवा पलायन नहीं करेंगे – यहीं कमाएंगे, यहीं रहेंगे।”


🛕 नंदा राजजात और कुंभ के लिए भव्य सहयोग का आग्रह

2026 में नंदा राजजात यात्रा और 2027 में हरिद्वार कुंभ मेला के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्र से पूर्ण सहयोग मांगा। बोले –

“ये केवल आयोजन नहीं, सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव हैं।”


🧘‍♂️ उत्तराखंड – अब योग, आयुर्वेद और आत्मनिर्भरता का गढ़

देश की पहली योग नीति, स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन, और आयुष हब के निर्माण की दिशा में राज्य बढ़ रहा है। तीन लाख युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना, सुशासन की रेटिंग में दूसरा स्थान और SDG में प्रथम स्थान — ये धामी सरकार की ताकत हैं।

“हमने केवल योजनाएं नहीं बनाई, उन्हें धरातल पर उतारा है।”


🔚 अंतिम पंक्ति:

जब सीमाओं से विकास की पुकार उठती है, और राजधानी तक वो गूंजती है – तब एक नया उत्तराखंड बनता है। मुख्यमंत्री धामी की मांगें सिर्फ उत्तराखंड नहीं, पूरे भारत की सुरक्षा और संस्कृति का सवाल हैं। क्या अब दिल्ली इन पहाड़ों की आवाज़ सुनेगी?


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