देश के चार प्रमुख धामो मे से एक बद्रीनाथ धाम के बेस कैंप जोशी मठ मे इन दिनो बिन बरसात के पानीफूट रहा है जमीन धंसने और घरों की दीवारों में दरार आने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय लोग दहशत में हैं और डर के साए में जीने को मजबूर है। संकट कि घड़ी मे भी सरकार आपके द्वार का दावा फिलहाल चमोली मे दिखाई नहीं दे रहा है
इसी तरह की दीवारें जोशीमठ के कई घरों में पड़ी हुई है और ये दरारे न सिर्फ डरा रहे हैं बल्कि सिस्टम की पोल भी खोल रही हैं जिला प्रशासन की नाकामी और सरकार की लापरवाही को भी उजागर कर रही हैं सवाल इस बात को लेकर के है कि जब पिछले 13 – 14 महीने से ही लोगो द्वारा इस खतरे को लेकर अलर्ट किया जा रहा था तब सरकार का सिस्टम कहां था
अब इन्ही सवालों के साथ ही संकट भी लगातार बढ़ रहा है जोशीमठ पर खतरा लगातार गहरा रहा है जोशीमठ बचेगा या नहीं इस सवाल को लेकर भी तमाम तरह के सस्पेंस बने हुए हैं और लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है
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लोगों की नाराजगी भी जायज है जिन घरों में वे सैकड़ों सालों से रहते आए हैं उन घरों को आखिर उन्हें छोड़ने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार है ? यह पानी आखिर कहां से निकल रहा है? और जोशीमठ शहर पर लगातार बढ़ रही दरारें ये बता रही हैं कि हालात काफी चुनौतीपूर्ण हैं और इन हालात का सामना लोग अपने आप कर रहे हैं अपने स्तर पर कर रहे हैं और सरकार पर लोग बहुत सवाल उठा रहे हैं कि संकट के समय जो इंतजाम होने चाहिए थे वह अभी नहीं किए गए हैं और दिक्कत इस बात की है ये चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। अब इस समस्या का समाधान कैसे होगा फिलहाल किसी के पास कोई जानकारी नहीं है
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जोशीमठ में सब कुछ टूट रहा है कुछ टूट चुका है कुछ टूटने की कगार पर है, और इन चुनौतीपूर्ण हालात के बाद लगातार इस बात को लेकर सवाल हैं कि आखिर इस समस्या का समाधान कैसे होगा, वहीं सरकारी सिस्टम सिर्फ दावे ही कर रहा है
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एक्सपर्ट्स की टीम अब तक मौके पर क्यों नहीं गई? यह सवाल भी सरकार से होना चाहिए और सरकार को इसका जवाब भी संजीदगी के साथ देना चाहिए।
लेकिन सरकार यह सब कुछ शायद करेगी नहीं क्योंकि सरकार कि अपनी शान है। अब संकट जिस तरीके से गहरा रहा है बढ़ रहा है चुनौतियां बढ़ रही हैं जिस तरह से दरारें पड़ रही हैं उसके बाद ये कहा जा रहा है कि तकरीबन 21 परिवारों के घर खाली कराए गए हैं और उन्हें सुरक्षित जगह पर शिफ्ट किया गया है कुछ को नगर पालिका में डाला गया है किसी को कुछ और जगहों पर रहने के इंतजाम तात्कालिक रूप से किए गए हैं लेकिन यह सिर्फ वैकल्पिक इंतजाम हैं उनके अपने घरों का क्या होगा , इतनी बड़ी आबादी आखिर जाएगी कहां ? कड़ाके की ठंड पड़ रही है और सवाल यह है कि लोग अपना सब कुछ छोड़कर कब तक इन तथाकथित सुरक्षित स्थानों पर रह पाएंगे । और ऐसे ही हालात लगातार रहे तो जोशीमठ शहर का क्या होगा ? जब पूरे शहर के अस्तित्व पर ही खतरा है तो शहर को बचाया कैसे जाएगा ? क्या सरकार अब तक सिर्फ और सिर्फ यह देखने की कोशिश कर रही थी कि सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा या फिर सरकार खुद नींद मे थी
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भूधंसाव को लेकर गुरुवार को प्रभावितों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने बद्रीनाथ हाईवे जाम लगा दिया । इसके अलावा लोकल बाजारों को भी बंद किया गया । लोगों ने अब चक्का जाम का एलान किया है।
सीएम धामी ने इस क्षेत्र के दोबारा अध्ययन के लिए विशेषज्ञों की आठ सदस्यीय टीम गठित की है। यह टीम गुरुवार से जोशीमठ में डेरा डालेगी और दो दिन तक भूधंसाव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण करेगी। साथ ही समस्या के समाधान के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक उपायों पर सरकार को अपना सुझाव देगी।
राज्य सरकार ने बीते साल अगस्त में भी विशेषज्ञों के दल को जोशीमठ भेजा था। दल ने सितंबर में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि जोशीमठ मुख्य रूप से पुराने भूस्खलन क्षेत्र के ऊपर बसा है। ऐसे क्षेत्रों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने की स्थिति में भूमि में समाने वाले पानी के साथ मिट्टी बहने से कई बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
सरकार कमेटी बनती है और वो अपना सुझाव भी देती है पर उसपर अमल नहीं होता धरातल पर तब तक काम सुरू नहीं होता जब तक सर के ऊपर से पानी न गुजर जाय , बरहाल बद्रीनाथ के बेस कैंप के रूप मे पहिचान रखने वाले जोशी मठ के लिए उत्तराखंड सरकार क्या करेगी इस पर सभी निगहे टिकी है
