देव भूमि उत्तराखंड में धार्मिक चार धाम यात्रा भगवान भरोसे ही चल रही है । ये 100 फ़ीसदी सच है। हालांकि यात्रा शुरू होने से पहले कई दौर की प्रशासनिक बैठके होती हैं लेकिन देहरादून और दिल्ली के एसी कमरों में बैठकर पहाड़ों के लिए नीतियां बनाने वाले ब्यूरोक्रेट्स जब तक धरातल पर बैठकर काम नहीं करेंगे तब तक ऐसी स्थितियां बार बार दो-चार होना ही पड़ेगा ।
चार धाम यात्रा को शुरू होने के लिए कुछ ही दिन बाकी हैं और यात्रा व्यवस्था के नाम पर न तो सड़क न बिजली पानी शौचालय और न संचार, कोई भी व्यवस्था दुरुस्त नहीं की जा सकी है । इतना ही नहीं सड़क का एक बड़ा हिस्सा आज भी यातायात के लिहाज से खतरे से खाली नहीं है, ऐसे में जब बजट का आवंटन ही 31 मार्च के बाद हो रहा हो तो कब टेंडर होंगे कब धरातल पर काम होगा और कब यात्रा चलेगी? इसका जवाब प्रशासन के पास ही हो सकता है उत्तरकाशी डीएम के तीन-तीन बार यमुनोत्री दौरा करने के बाद भी स्थिति मे कोई बदलाव नहीं आया
यमुनोत्री धाम की बात करें तो पाली घाट से जानकीचट्टी तक 27 किलोमीटर के दायरे में यमुनोत्री हाईवे जहां बेहद संकरा है वही मार्ग की स्थिति दयनीय है।
जगह-जगह गड्ढे होने के साथ ही सड़क के किनारे मिट्टी के ढेर लगे हैं जिसे वक्त रहते ठीक नहीं किया गया तो यात्रियों को इस वर्ष भी जोखिम भरा सफर करना पड़ेगा ।
केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना के आल वेदर रोड के अंतर्गत कार्य प्रगति पर है जबकि करीब 27 किलोमीटर के दायरे में काम अभी तक शुरू नहीं हो सका
जबकि इस 27 किलोमीटर के दायरे में चौड़ीकरण के लिए कार्यदाई संस्था एनएच के द्वारा भूमि अधिग्रहण कर उसका मुआवजा भी प्रभावितों को बांट दिया गया है इस संकरे और बदहाल सड़क पर चौड़ीकरण के लिए स्थानीय लोग लगातार मांग कर रहे हैं लेकिन हाई पावर कमेटी की रोक के चलते सड़क चौड़ीकरण का कार्य अधर में लटका है।
यमुनोत्री यात्रा पर गए डीएम अभिषेक रोहिल्ला के साथ गए पत्रकारों के दल से ही जान लेते हैं कि धरातल पर यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग और यमुनोत्री धाम की क्या स्थिति है
