🌊 गांव के बच्चों की अनूठी मिसाल:
🚩 परंपरा और पर्यावरण का संगम
उत्तरकाशी के कंडारी गांव में राजकीय इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने वह काम कर दिखाया, जो अक्सर बड़े-बड़े अभियानों में अधूरा रह जाता है। गांव के प्राचीन जल स्रोत गाडा-धारा की सफाई, पुनर्निर्माण और पूजा कर बच्चों ने न सिर्फ धारा को नया जीवन दिया बल्कि पूरे इलाके के लिए एक प्रेरणादायी संदेश भी भेजा।

🙏 माता–पिता की स्मृति में जनसेवा
इस पुनीत कार्य में गांव के मूल निवासी और मुंबई के स्थापित व्यवसायी सुभाष गौड़ का विशेष सहयोग रहा।
उन्होंने कहा—
“मेरी माता स्व. कमला देवी और पिता स्व. बालक राम गौड़ की पुण्य स्मृति में यह कार्य जनमानस को समर्पित है।”
गौड़ ने बच्चों और शिक्षक सुरक्षा रावत के इस प्रयास की जमकर सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान वृक्षारोपण कर गौड़ ने अपने माता-पिता को सच्ची श्रद्धांजलि दी।
🌱 बच्चों का जुनून, पर्यावरण का संरक्षण
कार्यक्रम के संयोजक शिक्षक सुरक्षा रावत ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा—
“जल है तो कल है। बच्चों की यह पहल भविष्य की पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत है।”

उन्होंने बताया कि “कल के लिए जल अभियान” और “बीज बम अभियान” जैसे प्रयासों में भी छात्र लगातार योगदान दे रहे हैं। आने वाले समय में आसपास के गांवों में भी जल स्रोतों का संरक्षण और सौंदर्यकरण जारी रहेगा।
👧 बच्चों ने दिखाई जिम्मेदारी
मानसी, रिया, आरुषी, श्वेता, खुशी, नव्या चौहान, वेदांश, अंशुमन, सिद्धार्थ, प्रिंस, ऋषभ, अजय और विजय जैसे बच्चों ने मिलकर साबित कर दिया कि अगर इरादा सच्चा हो तो बदलाव लाना मुश्किल नहीं।
🌍 एक सीख, एक संकल्प
कंडारी गांव की यह धारा अब सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि परंपरा, पर्यावरण और पीढ़ियों को जोड़ने वाला प्रतीक बन चुकी है।
👉 यह कहानी हमें याद दिलाती है कि जल ही जीवन है, और जीवन को बचाना हमारी जिम्मेदारी।

