22 से बिफोर और कोरोना आफ्टर इफ़ेक्ट पर किशोर की चर्चा – टिहरी में अपने पैतृक गाँव पाली से महाष्टमी से सुरुवात

Share Now

कोरोना महामारी के बाद उत्तराखंड लौटे प्रवासी को यहाँ मिलने वाले रोजगार के बाद उत्तराखंड की राजनीति में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। आमतौर पर पलायन के बाद खाली पहाड़ों में गिने-चुने वही परिवार ही शेष बचे थे जिनके पास कोई विकल्प नहीं था, बदली हुई परिस्थितियों में यदि प्रवासी अपने गांव में वापस लौट कर वही रोजगार करने लगते हैं तो गाँव में एक मिली जुली सोच के बाद गांव में नई तरह का नेतृत्व जन्म लेने वाला है जिसके बाद उत्तराखंड की राजनीति को भी झटका लग सकता है, अब तक अपनी ही पार्टी और राजनीति से झटका खाने के बाद परिपक्व हो हुए टिहरी के किशोर दा भी गांव से इसी मंत्र को लपकने के लिए गांव की यात्रा और रत बसा करने की नीति पर निकल पड़े है।


प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष व वनाधिकार आन्दोलन के प्रणेता किशोर उपाध्याय 28 जून से उत्तराखंड के गाँवों में कोरोना से उत्पन्न परिस्थितियों,प्रतिकूल प्रभावों और उसके समाधानों पर जन-संवाद आरम्भ कर रहे हैं।

उपाध्याय ने बताया कि इन कठिन परिस्थितियों में उत्तराखंड के सुदूरवर्ती गावों पर फ़ोकस करना अत्यावश्यक हो गया है और इसीलिये उन्होंने नई टिहरी अपना बसेरा बना लिया है और मूलतः वे अपने पैतृक गाँव पाली को अपने आन्दोलन, सामाजिक और राजनैतिक गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु बना रहे हैं।
महात्मा गांधी की भारत की अवधारणा के मूल यहाँ के गाँव थे।
उपाध्याय ने कहा कि इसी भावना को समझने के लिये गत 30 महीनों में उन्होंने लगभग 200गाँवों में रात्रि ‘बासा’ कार्यक्रम किये और वनाधिकार आन्दोलनों की मुहिम उसी अनुभव का परिणाम है।
आज परिस्थितियाँ दुरूह और जटिल हो गयी हैं।मजबूरी के पलायन और मजबूरी की घर वापसी ने उत्तराखंडी युवाओं के सामने विकट स्थिति पैदा कर दी है, युवाओं के सामने ही नहीं, बल्कि गाँवों के सामने भी।
राज्य में अचानक आत्म हत्याओं की प्रवृति बढ़ रही है।ग्रामीण क्षेत्र की क्रय शक्ति में 70% की कमी आयी है।महंगाई ने सुरसा के मुँह का रूप और बेरोज़गारी ने हनुमान जी की पूँछ का रूप ले लिया है।सीमाओं पर हो रही दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं ने राज्य सैनिक प्रभावी क्षेत्र होने के कारण ग्रामीण जन मानस में भय का वातावरण व्याप्त कर दिया है।
उपाध्याय ने कहा कि 28 जून को वे अपने गाँव पाली से महाष्टमी के पावन अवसर पर भगवती
माँ राज राजेश्वरी की वंदना कर इस संवाद का शुभारम्भ करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!