शराब मे मिलावट तो आजीवन कारावास? – आईपीसी 272 से क्यो बचता है आबकारी विभाग

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कहावत है  कि पीने वाले को पीने का बहाना चाहिए। कभी  खुशी के मौके पर तो कभी गम भुलाने के लिए भी शराब का सहारा लिया जाता है । जहां चार यार मिल जाते हैं, वहां जाम से जाम टकराए जाते हैं। नशे की हालत में आपस में सिर फुटौव्वल होते भी देखी गई है। नशे में व्यक्ति अपने ऊपर से नियंत्रण खो बैठता है। कई बार हादसे भी होते हैं। लोग अमूमन सार्वजनिक स्थानों पर भी शराब पीने से नहीं हिचकते।

कोतवाली उत्तरकाशी पुलिस द्वारा उ0नि0 प्रकाश राणा के नेतृत्व में चैकिंग अभियान चलाया गया तो चैकिंग के दौरान स्थान देवी धार के पास से दो व्यक्तियों को  अवैध कच्ची शराब के साथ गिरफ्तार किया गया, अभियुक्त गणों की निशानदेही पर कच्ची शराब बनाने के उपकरण ड्रम, पाईप, भगोना आदि भी बरामद किये गये एवं मौके पर से करीब 500 लीटर लहान को नष्ट किया गया, लहान का सैंपल लिया गया है जिसको परिक्षण के लिए भेजा जायेगा।

 

क्या सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीना अपराध है? आज हम इसी पर चर्चा करते हैं ।

सामान्य तौर पर कहें तो निजी स्थान पर शराब पीना अपराध नहीं है, किंतु सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीना एवं लोगों की झुंझलाहट, परेशानी का कारण बनना, अतिचार करना अवश्य अपराध है।

इसके खिलाफ भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता अर्थात आईपीसी (IPC) की धारा- 510 के अंतर्गत इसके लिए दंड का प्रावधान किया गया है। सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने वालों एवं अतिचार करने वालों के खिलाफ पुलिस आईपीसी की धारा-510 के अंतर्गत कार्रवाई कर सकती है। इसके अनुसार नशे की हालत में किसी का सार्वजनिक अथवा लोक स्थान अथवा  किसी ऐसे स्थान में, जहां उसके प्रवेश से किसी व्यक्ति को दिक्कत  हो, उसे 24 घंटे का कारावास अथवा 10 हजार रुपये का जुर्माना अथवा दोनों सजाएं साथ दी जा सकती हैं। यह एक जमानती एवं असंज्ञेय अपराध है। यह अपराध समझौता योग्य भी नहीं है। यदि कोई व्यक्ति शराब के नशे में किसी सार्वजनिक क्षेत्र में उपद्रव करता मिलता है तो आईपीसी की धारा- 290 भी साथ में जोड़ी जा सकती है। यह धारा जमानत योग्य है। इसमें जुर्माने का भी प्रावधान है। किसी भी मजिस्ट्रेट के सामने यह मामला ले जाया जा सकता है। इसके अंतर्गत पांच हजार रुपये का जुर्माना नियत किया गया है। शराबबंदी राज्यों का विषय है। कई राज्यों में शराब बिक्री पर प्रतिबंध है। वहीं, कुछ राज्यों में जहां यह बिक रही है, न्यूनतम उम्र को लेकर भी भिन्नता देखने को मिलती है।

आबकारी अधिनियम की धारा 60 शराब के अवैध कारोबारियों के लिए अभयदान से कम नहीं है। इस धारा में मामला दर्ज होने पर आरोपियों को थाने से ही जमानत मिल जाती है। जबकि, ऐसे मामलों में आईपीसी की धारा 272 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें सजा के कड़े प्रावधान हैं। बावजूद, यह नहीं लगाई जाती है, जिससे अवैध शराब का कारोबार जमकर फलफूल रहा है। इक्का-दुक्का मामलों को छोड़ बाकी सभी में अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। इसमें से ज्यादातर आरोपियों को थाने से ही मुचलके पर छोड़ दिया जाता है। बाहर निकल कर एक बार फिर वह अपने काम को अंजाम देने में जुट जाते हैं।

जबकि, शराब में खतरनाक अपमिश्रण पाए जाने पर आईपीसी की धारा 272 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। इस धारा के तहत मिलावट को संज्ञेय व अजमानतीय अपराधों में रखा गया है। इसका विचारण सत्र न्यायालय में ही किया जा सकता है। लेकिन, यह धारा शराब के अवैध कारोबारियों पर नहीं लगाई जाती। आबकारी विभाग इससे बचता है, जिससे अवैध शराब के कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।

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