पति के सामने बह गई जिंदगी… बहाव तेज, SDRF को नहीं मिला सुराग

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उजेली घाट पर मौत की धारा! जल भरने गई महिला भागीरथी में बही, लापता


🌊 “पल भर में सब खत्म… उजेली घाट पर बह गई एक बेटी, एक बहू, एक ज़िंदगी!”

उत्तरकाशी में भागीरथी नदी ने एक और परिवार की खुशियां बहा दीं।
बुधवार दोपहर, उजेली घाट पर जल भरने गई कस्तूरी देवी, अपने पति की आंखों के सामने तेज बहाव में समा गई। वो चीखे, दौड़े, मगर नदी का प्रवाह उससे तेज निकला।


👣 एक फिसला क़दम… और हमेशा की जुदाई!

नारायणपुरी, बड़कोट की रहने वाली कस्तूरी देवी, अपने मायके खांड गांव आई हुई थीं। दोपहर बाद पति के साथ जल भरने गईं थीं कि घाट पर उनका पैर फिसल गया
अगले ही पल… तेज रफ्तार भागीरथी नदी उन्हें बहा ले गई।

👉 “मैंने उसका हाथ पकड़ा था… पर वो फिसल गई… और फिर बस पानी था…”
घटना से टूटा हुआ पति, आंखों में आंसू और दिल में पछतावा लिए


🚨 पुलिस, SDRF और QRT ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

सूचना मिलते ही नगर कोतवाल भावना कैंथोला, SDRF, और क्यूआरटी की टीम मौके पर पहुंची।
नदी का जलस्तर ऊंचा था, और बहाव बेहद तेज। घंटों चला सर्च ऑपरेशन, लेकिन अभी तक कस्तूरी देवी का कोई सुराग नहीं मिला है।

“बहाव बहुत तेज़ है। हमारी टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं।”
भावना कैंथोला, नगर कोतवाल, उत्तरकाशी


💔 घर में पसरा मातम, आंखों में खालीपन

खांड गांव में मातम का माहौल है। जिस बेटी ने दोपहर तक हंसते हुए पानी भरने की बात कही थी,
अब उसका पता नहीं।
घरवाले टूट चुके हैं, पति गुमसुम है और गांव वालों की आंखें नम।


⚠️ भागीरथी का घाट फिर बना हादसे का घर… कब जागेगा सिस्टम?

यह पहली घटना नहीं है…
हर मानसून में घाटों की सुरक्षा सवालों में घिरती है — न रेलिंग, न चेतावनी बोर्ड, न लाइफ जैकेट की व्यवस्था।

क्या घाटों पर सुरक्षा इंतजाम अब भी ‘भाग्य’ के भरोसे रहेंगे?


🕯️ सोचिए… अगर वो आपकी मां होती? आपकी बहन?

हर साल हम खबर बनाते हैं, दुख जताते हैं, और फिर भूल जाते हैं।
पर जिनकी ज़िंदगी बहती है… उनका दुख कभी कम नहीं होता।

🙏 प्रशासन से अपील है: उजेली घाट जैसे सभी संवेदनशील क्षेत्रों में तुरंत सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।
✍️ Meru Raibar News | आंखें खोलने वाली सच्ची खबर


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