“नन्हीं उम्मीदों को मिला सहारा: ‘नंदा-सुनंदा’ बन रहा बेटियों का उज्ज्वल भविष्य!” 🌸
DM सविन बंसल का मानवीय प्रयास – हर असहाय बेटी के सपनों को मिल रही उड़ान
💫 जब प्रशासन बना बेटी का संरक्षक… और शिक्षा बनी उसकी ढाल!
देहरादून से रिपोर्ट –
एक बेटी की आँखों में झिलमिलाते सपने तभी पूरे होते हैं, जब उसे मिले शिक्षा की ताकत और समाज का साथ।
जिलाधिकारी सविन बंसल के ‘नंदा-सुनंदा’ प्रोजेक्ट ने आज फिर पांच और बालिकाओं की बुझती लौ को रोशन कर दिया।
📍 165800 रुपये की सहायता से 5 असहाय बालिकाएं फिर से लौटीं स्कूल और कॉलेज की ओर।
अब तक 38 बेटियों को मिल चुका है इस मुहिम का सहारा, कुल सहायता राशि: ₹14 लाख!
👧 “धन्यवाद डीएम सर… आप नहीं होते तो शायद हमारी किताबें बंद हो जातीं…”
जिन बच्चियों की शिक्षा गरीबी की दीवार से टकरा गई थी, उनके चेहरों पर आज उम्मीद की मुस्कान लौट आई।
गौरांशी, अनुष्का, तनु, वैष्णवी और शताक्षी… आज सिर्फ नाम नहीं, बल्कि प्रेरणा बन गईं हर उस बेटी के लिए, जो संघर्ष में भी सपने देखना नहीं छोड़ती।
🗣️ “हम वादा करते हैं कि हम भी बड़े होकर किसी और की मदद करेंगे… जैसे आपने की हमारी।” – भावुक छात्राएं
📘 “नंदा-सुनंदा” नहीं सिर्फ योजना, यह एक सामाजिक आंदोलन है!
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा –
🗣️ “बेटियां सिर्फ बोझ नहीं, वो उजाला हैं… हम रहे न रहे, ‘नंदा-सुनंदा’ चलता रहेगा। हर बेटी को मिलेगा पढ़ने का हक़।”
इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत जिले की उन बेटियों को चुना जाता है,
- जिनके पास संसाधन नहीं
- पर जज़्बा है
- और जिनकी शिक्षा बीच में छूट गई हो
DM स्वयं अपने सोर्सेस से फंड एकत्र कर उन्हें नई शुरुआत देते हैं।
📊 आज की सहायता सूची:
| छात्रा का नाम | स्कूल / कॉलेज | कक्षा | सहायता राशि |
|---|---|---|---|
| गौरांशी सिंघल | न्यू इमेज इंटरनेशनल | 12वीं | ₹35,000 |
| अनुष्का क्षेत्री | केंद्रीय विद्यालय | 11वीं | ₹7,800 |
| वैष्णवी | शिवालिक इंटरनेशनल | 12वीं | ₹33,000 |
| तनु शर्मा | उत्तरांचल यूनिवर्सिटी | 12वीं | ₹60,000 |
| शताक्षी शर्मा | इंडियन एकेडमी | 11वीं | ₹30,000 |
🙌 DM की टीम बनी उम्मीदों की रीढ़
इस अवसर पर मौजूद रहे –
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, SDM कुमकुम जोशी, DPO जितेंद्र कुमार, और प्रोबेशन ऑफिसर मीना बिष्ट।
सबने बेटियों का हौसला बढ़ाया और इस जन-कल्याण प्रयास को सराहा।
💭 जब बेटी पढ़ेगी, तभी समाज बढ़ेगा…
‘नंदा-सुनंदा’ की ये चिंगारी अब एक अलख बन चुकी है —
हर वो हाथ जो थामे कलम, हर वो आँख जो देखे सपना… उसे चाहिए सिर्फ एक भरोसा।
👉 क्या आप तैयार हैं किसी और की नंदा-सुनंदा बनने के लिए?
क्योंकि सपने देखने का हक़ हर बेटी को है… और उसे हकीकत में बदलना समाज की जिम्मेदारी।
– Meru Raibar News
“जहां उम्मीद होती है, वहीं से बदलता है भविष्य!”
