अपने गिरेबान में झांके उत्तराखंड सरकारः गरिमा मेहरा दसौनी

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देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस की प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने प्रदेश मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों को सिलसिलेवार आड़े हाथों लिया। दसोनी ने कांग्रेस पार्टी के द्वारा 25 जून को प्रस्तावित हरिद्वार के सुभाष घाट पर उपवास कार्यक्रम का उपहास उड़ाने पर मुख्यमंत्री तीर्थ रावत की जमकर खिंचाई की। दसोनी ने कहा कि जो उपवास कांग्रेस पार्टी कर रही है वह दरअसल सत्ताधारी दल को करना चाहिए था, जिस तरह से कुंभ और गंगा मैया की गरिमा और प्रतिष्ठा को धूमिल और दागदार करने का कुकृत्य भाजपा की प्रदेश सरकार ने किया है उसके लिए उन्हें देश की जनता एवं गंगा मैया से माफी मांगते हुए पश्चाताप करना चाहिए था।
 दसोनी ने कहा कि अच्छा होता यदि सूबे के मुख्यमंत्री तीर्थ रावत अपनी सरकार की हुई गलतियों पर पर्दा डालने के बजाय और विपक्ष पर ताने कसने के बजाय इस फर्जीवाड़े को गंभीरता से लेते और दोषियों पर कड़ी से कड़ी दंडनात्मक कार्यवाही करते। दसौनी ने शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल पर भी सीधा हमला बोलते हुए कहा यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है की सरकार के शासकीय प्रवक्ता और काबीना मंत्री सुबोध उनियाल जिस तरह से फर्जीवाड़े के अपराधियों को बचाने की मंशा से कुंभ घोटाले को ही सिरे से नकार रहे है वह अपने आप मे बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। दसौनी ने हरक सिंह रावत के उस बयान पर भी चुटकी ली जिसमें उन्होंने शमशेर सिंह सत्ताल को ललकारते  हुए कहा की क्या वह पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की भी जांच करवाएंगे? दसोनी ने कहा कि हरक सिंह रावत का यह बयान अपने आप में कई सवाल खड़े करता है ।
 दसोनी ने कहा की मंत्री महोदय के बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि कर्मकार बोर्ड में हुए घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की संलिप्तता है और यदि ऐसा है तो फिर सिस्टम से ऊपर कोई भी नहीं  होना चाहिए चाहे वह वर्तमान मुख्यमंत्री हो या पूर्व मुख्यमंत्री सभी पर जांच बैठनी चाहिए और जनता को सच का पता लगना चाहिए ।दसोनी ने मदन कौशिक का धन्यवाद किया कि कम से कम अब विपक्ष नहीं स्वयं सूबे के भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष इस बात को मान रहे हैं कि कर्मकार बोर्ड में जो घमासान चल रहा है वह प्रदेश और भाजपा हित में नहीं है और मुख्यमंत्री से उन्होंने हस्तक्षेप की मांग की। दसोनी ने कहा कि आखिर कौशिक के बयान से  इस बात की पुष्टि हो ही जाती है भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और मंत्रियों के बीच में समन्वय का गहरा अभाव है, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता उठा रही है जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

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