प्यार, विवाद और आवेश का खौफनाक अंत — युवती की धारदार हथियार से हत्या

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🔴 दूल्हा बाज़ार में खून से सनी सुबह

देहरादून | 02 फरवरी 2026 | कोतवाली नगर

सुबह की हलचल… दुकानें खुलने की तैयारी…
और उसी बीच दूल्हा बाज़ार की एक गली में चीखें, खून और सन्नाटा।
काम पर निकली एक युवती… और कुछ ही पलों में उसकी ज़िंदगी हमेशा के लिए खत्म।


⚠️ गली में हुआ हमला, अस्पताल में मौत

कोतवाली नगर क्षेत्र के दूल्हा बाज़ार में आज सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई,
जब एक युवक ने धारदार हथियार से एक युवती पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया।

गंभीर हालत में युवती को दून चिकित्सालय ले जाया गया,
लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।


🕯️ कौन थी मृतका?

मृतक युवती की पहचान
👉 गुंजन श्रीवास्तव, पुत्री मनीष श्रीवास्तव,
👉 निवासी गोविन्दगढ़ के रूप में हुई है।

गुंजन दूल्हा बाज़ार की एक दुकान में काम करती थी
आज सुबह वह रोज़ की तरह काम पर पहुंची थी।
स्कूटी खड़ी कर, अपने जीजा के घर के पास वाली गली से दुकान की ओर बढ़ी ही थी,
कि मौत उसका इंतज़ार कर रही थी।


🚨 आरोपी गिरफ्तार — पहचान आकाश

घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए
👉 आरोपी युवक आकाश पुत्र कोमलराम (27 वर्ष)
👉 निवासी मन्नूगंज, खुडबुड़ा, कोतवाली नगर
को गिरफ्तार कर लिया।


💔 तीन साल का रिश्ता, अंत में खून

पुलिस पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वो और भी ज्यादा झकझोर देने वाली है।

आरोपी और गुंजन के बीच
👉 पिछले 3 वर्षों से जान-पहचान और मिलना-जुलना था
👉 आरोपी का गुंजन के घर आना-जाना भी था।

जब यह बात गुंजन के परिजनों को पता चली,
तो आपत्ति दर्ज कराई गई,
और मामला दोनों परिवारों तक पहुंचा।


📄 समझौता, शिकायत… फिर भी नहीं रुका विवाद

  • दोनों पक्षों के बीच चौकी खुडबुड़ा में लिखित समझौता हुआ
  • तय हुआ कि आगे कोई संपर्क नहीं रहेगा
  • 2 दिन पहले ही गुंजन ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर आरोपी को समझाने की बात कही थी

पुलिस आरोपी की तलाश में थी,
लेकिन आरोपी फोन बंद कर फरार हो गया,
अलग-अलग जगह छिपता रहा।


😡 आवेश, अस्वीकृति और गृह क्लेश

पुलिस के अनुसार —
लगातार चल रहा घरेलू तनाव,
पुलिस का दबाव,
और गुंजन द्वारा बातचीत बंद कर देना…

👉 इन्हीं सब कारणों से आवेश में आकर आरोपी ने यह खौफनाक कदम उठाया।


🩸 शहर में सवाल, दिलों में डर

यह सिर्फ एक हत्या नहीं…
यह सवाल है हमारे समाज पर,
रिश्तों की समझ पर,
और उस सोच पर —
जहां अस्वीकृति को स्वीकार नहीं किया जाता।


🔚 अंत में एक सवाल

👉 अगर समय रहते बात सुनी जाती…
👉 अगर आवेश पर काबू होता…

तो क्या आज गुंजन ज़िंदा होती?

Meru Raibar News
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