शहीद गोविंद सिंह की पत्नी बोलीं – “ऐसा लगा जैसे वो खुद आकर कह रहे हों – मैं यहीं हूं”

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📰 Meru Raibar | विशेष रिपोर्ट – प्रिंट मीडिया
📍स्थान: देवर गांव, गुप्तकाशी, रुद्रप्रयाग | अवसर: 26वां कारगिल विजय दिवस


उत्तराखंड की वीरभूमि ने झुककर दी श्रद्धांजलि – शहीदों के परिजनों का हुआ सम्मान

🌄 देवभूमि में गूंजीं वीरगाथाएं, गढ़वाल की मिट्टी ने फिर कहा – “शहीद अमर हैं”


गर्व, आँसू और देशभक्ति के अनमोल क्षणों के साक्षी बने रुद्रप्रयाग के देवर गांव, जहां कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर वीर शहीदों को नमन करते हुए एक भावुक और गरिमामयी कार्यक्रम आयोजित किया गया।

भारतीय सेना, स्थानीय प्रशासन, पूर्व सैनिक, और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक स्मरणीय जनभावना उत्सव में बदल दिया।


🔶 कार्यक्रम की मुख्य झलकियां:

  • 🕯️ दो मिनट का मौन और दीप प्रज्वलन के साथ वीर शहीदों को अर्पित की गई श्रद्धांजलि।
  • 🎖️ नायब सूबेदार सुधीर चंद्र के नेतृत्व में सेना के जवानों ने शहीद परिवारों को स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र सौंपे।
  • 🫡 कारगिल युद्ध में शहीद नायक गोविंद सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती उमा देवी जी को सम्मानित किए जाने के भावुक क्षण ने पूरे परिसर को नम कर दिया।

💬 श्रीमती उमा देवी के शब्दों में अमरता की झलक:

“आज जब सेना ने मुझे यह सम्मान दिया, तो ऐसा लगा जैसे मेरे पति खुद सामने खड़े होकर कह रहे हों – ‘मैं गया नहीं, यहीं हूँ।’ यह सम्मान केवल एक प्रतीक नहीं, मेरे जीवन का सबसे बड़ा गर्व है।”


🗣️ सेना के अधिकारियों का संदेश:

“शहीद हमारे बीच भले न हों, पर वे हमारे दिलों में हैं। उनके परिवार, उनका बलिदान, और उनकी वीरता भारत की पहचान है।”


📌 Meru Raibar की विशेष टिप्पणी:

यह आयोजन सिर्फ एक श्रद्धांजलि नहीं था, बल्कि उत्तराखंड की वीर भूमि द्वारा वीरों को किया गया पुनः प्रणाम था। यह संदेश था कि जो मातृभूमि पर बलिदान देते हैं, वे कभी भुलाए नहीं जाते।


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