भारी बारिश ने सिलाई बैंड, ओजारी और स्यानचट्टी को बनाया तबाही का मैदान, घर-मकान, सड़कें बर्बाद… आसमान से हालात देख भावुक हुए मुख्यमंत्री

ओपनिंग पैरा
“नीचे मलबा ही मलबा था… उफनती नदियां, टूटी सड़कें, और बर्बाद खेत। हेलिकॉप्टर की खिड़की से झांकते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की आंखों में चिंता साफ झलक रही थी। यमुनोत्री हाईवे पर कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया है कि रूह कांप जाए!”
मुख्य स्क्रिप्ट:
रविवार को उत्तरकाशी के बड़कोट तहसील में यमुनोत्री मार्ग पर सिलाई बैंड, ओजारी और स्यानचट्टी इलाकों में भारी बारिश ने कहर मचा दिया। अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने रास्तों को निगल लिया, गांवों को मलबे में दबा दिया और लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को जैसे रोक दिया।
CM धामी ने हेलिकॉप्टर से हवाई निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया। टूटे पुल, बहती सड़कें, कीचड़ में लिपटी खेतों की हरियाली… हर दृश्य उन्हें बेचैन कर रहा था।

मुख्यमंत्री ने कहा –
“प्रभावित क्षेत्रों की असली तस्वीर देखकर दिल दहल गया है। राहत और बचाव कार्यों की फिर से समीक्षा होगी। सरकार इस आपदा की घड़ी में हर एक नागरिक के साथ है। किसी को भी मदद के बिना नहीं रहने देंगे।”
मुख्यमंत्री ने NDRF, SDRF और जिला प्रशासन की मेहनत की सराहना करते हुए अफसरों को सख्त निर्देश दिए कि विस्थापित लोगों को तत्काल आश्रय, भोजन, दवाइयां और ज़रूरी मदद दी जाए।
लोगों की आंखों में डर और भविष्य की चिंता साफ दिख रही है। गांव के ही एक बुजुर्ग, गोपाल सिंह, ने रोते हुए कहा —
“घर मलबे में दब गया बेटा… अब छत कहां से लाऊं? खेती भी बर्बाद हो गई। सरकार ही आखिरी आस है।”
इस दौरान राज्यसभा सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी मुख्यमंत्री के साथ रहे। उन्होंने कहा —
“हम लोग एक-एक परिवार तक मदद पहुंचाएंगे। यह वक्त हिम्मत और एकजुटता का है।”
क्लोजिंग लाइन:
यमुनोत्री हाईवे पर कुदरत के इस कहर ने याद दिला दिया कि पहाड़ों की खूबसूरती के पीछे कितनी खामोश तबाही छुपी होती है। सवाल है — क्या इंसान फिर जीत पाएगा इस कुदरती चुनौती से?
