“अब अस्पतालों में बदलाव की आंधी! DM सविन बसंल का तेज एक्शन — ऋषिकेश में खुलेगा हाईटेक टीकाकरण कक्ष”

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सरकारी अस्पताल में पहली बार बच्चों के लिए रंग-बिरंगे टीकाकरण कक्ष की तैयारी, दवाई खिड़की भी खुली

देहरादून से रिपोर्ट

सरकारी अस्पताल में बच्चे पहले डरते थे… अब मुस्कुरा कर टीका लगवाएंगे!” — ये सपना अब हकीकत बनने जा रहा है। जिलाधिकारी सविन बसंल ने ऋषिकेश के उप जिला चिकित्सालय को हाईटेक सुविधाओं से लैस करने का ऐलान किया है। आदेश दिए और काम शुरू भी हो गया है!


DM का सुपरफास्ट एक्शन — अब देर नहीं

  • सीएम के संकल्प से प्रेरित DM सविन बसंल ने स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह बदलने की ठानी है।
  • सरकारी अस्पतालों की पुरानी छवि बदलने के लिए अब “त्वरित संज्ञान, प्रभावी एक्शन” ही जिला प्रशासन की नई कार्यशैली है।

मरीजों को राहत देना ही असली प्रशासन है। दवाई की खिड़की बंद नहीं होनी चाहिए, बल्कि दिल हमेशा खुला रहना चाहिए।” — सविन बसंल, जिलाधिकारी देहरादून


बच्चों के लिए रंग-बिरंगी दुनिया

  • उप जिला चिकित्सालय ऋषिकेश में मॉडर्न टीकाकरण कक्ष बनने जा रहा है।
  • बच्चों के लिए रंगीन दीवारें, पेंटिंग्स, खिलौने और मनोरंजन की सुविधाएं होंगी।
  • एसी, रजिस्ट्रेशन काउंटर और बेहतर बैठने की व्यवस्था — सब कुछ तेजी से तैयार हो रहा है।

मुख्य नर्स संगीता कहती हैं —

अब बच्चे डरेंगे नहीं, हंसते-खेलते टीका लगवाएंगे। ये सचमुच बहुत बड़ा बदलाव है।


दवाई खिड़की बंद? DM की फटकार, तुरंत खोली गई खिड़की

  • DM ने पाया कि दवाई वितरण कक्ष की खिड़की बंद पड़ी थी।
  • उन्होंने अफसरों को जमकर फटकार लगाई।
  • महिला, पुरुष और बुजुर्गों के लिए अलग-अलग दवाई वितरण खिड़की के आदेश दिए।
  • अब ऋषिकेश अस्पताल में दवाई खिड़की फिर खुल चुकी है।

एक मरीज रामचरण ने राहत की सांस लेते हुए कहा —

पहले घंटों लाइन में खड़े रहते थे। अब काम झटपट हो रहा है। DM साहब की सख्ती असर दिखा रही है।


स्टाफ की कमी पर भी ऐक्शन

  • ऋषिकेश अस्पताल में लैब टेक्नीशियन के दो पद खाली हैं।
  • ब्लड बैंक में ब्लड सेपरेटर के लिए नए स्टाफ की डिमांड शासन को भेजी जा रही है।
  • कोरोनेशन हॉस्पिटल में नया ब्लड बैंक युद्ध स्तर पर बनाने के निर्देश जारी।

क्या सरकारी अस्पतालों का चेहरा बदलेगा?

कभी बदइंतजामी की मिसाल माने जाने वाले सरकारी अस्पताल, अब बदलाव की राह पर हैं। ऋषिकेश का उप जिला अस्पताल मॉडल अस्पताल बनने की ओर बढ़ रहा है।

आज सवाल सिर्फ इतना है —
क्या ये बदलाव पूरे उत्तराखंड के अस्पतालों तक पहुंचेगा?

क्योंकि जब इरादे ईमानदार और तेज हों… तो दवाएं भी वक्त पर मिलती हैं और मुस्कानें भी लौट आती हैं।


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