आईटीबीपी को टिहरी से हुई 1.20 कुंतल ट्राउट मछली की पहली आपूर्ति
टिहरी की पहाड़ियों में अब सिर्फ हिमालय की ठंडक ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की गर्माहट भी महसूस की जा सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने की मुहिम एक और कामयाब मुकाम पर पहुंची है। टिहरी जनपद के जौनपुर ब्लॉक के हटवाल गांव से सॉन्ग वैली मत्स्य जीवी सहकारी समिति ने सोमवार को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को 1 कुंतल 20 किलो ताज़ी ट्राउट मछली की आपूर्ति की।
यह मछलियां आईटीबीपी देहरादून के सीमाद्वार कैंप में पहुंचाई गईं, जहां अब सेना के जवान स्वादिष्ट व पौष्टिक ट्राउट फिश का आनंद ले सकेंगे। यह सप्लाई उस करार का हिस्सा है, जिसमें स्थानीय स्तर पर आईटीबीपी को मछली, मुर्गी और बकरी जैसे उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी है।

स्थानीय युवक ने रचा आत्मनिर्भरता की सफलता का अध्याय
ग्राम हटवाल निवासी और सहकारी समिति के अध्यक्ष पंचम हटवाल ने स्वरोजगार की राह पर चलते हुए ट्राउट मछली पालन को अपना व्यवसाय बनाया। वर्ष 2019 में मत्स्य विभाग की मदद से उन्होंने 10 सीमेंटेड तालाबों का निर्माण किया और ट्राउट पालन शुरू किया। व्यापार में मुनाफा देखने के बाद उन्होंने 2022 में पांच और तालाब बनाए। आज वे सालाना 3-4 लाख रुपए की आमदनी कर रहे हैं और दिल्ली, चंडीगढ़, चंबा, काणाताल, धनोल्टी आदि में सप्लाई कर रहे हैं।
आईटीबीपी को ट्राउट फिश सप्लाई करना उनके लिए एक “गौरवपूर्ण क्षण” रहा। उन्होंने कहा, “आईटीबीपी से करार हमारे व्यवसाय के लिए एक बड़ा मंच है, जिससे न केवल आमदनी बढ़ी है, बल्कि ब्रांड वैल्यू भी बनी है।”
सरकार की योजना बनी ग्रामीण आत्मनिर्भरता का आधार
सहायक निदेशक मत्स्य विभाग टिहरी, उपेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सॉन्ग वैली समिति से आईटीबीपी को हर हफ्ते 120 किलो मछली की मांग के अनुसार सप्लाई की जाएगी। यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ को मजबूती देने के साथ-साथ क्षेत्रीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर रही है।
ट्राउट फिश: स्वाद और सेहत दोनों में अव्वल
ट्राउट मछली को उसके उच्च पोषण मूल्य के लिए जाना जाता है। इसमें ओमेगा-3 व ओमेगा-6 फैटी एसिड, उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, विटामिन B12, B6, नियासिन, राइबोफ्लेविन, आयोडीन, जिंक, और सेलेनियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। 100 ग्राम मछली में 20-25 ग्राम प्रोटीन होता है, जो शरीर में तेजी से अवशोषित होता है।
टिहरी पहले भी रहा है अग्रणी
गत वर्ष टिहरी ने उत्तरकाशी स्थित आईटीबीपी मंथली को 125 कुंतल ट्राउट मछली सप्लाई कर मिसाल कायम की थी। अब हटवाल गांव से शुरू हुई यह ताजा पहल टिहरी को एक बार फिर आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार के क्षेत्र में अग्रणी बना रही है।
📌 विशेष उल्लेख:
इस प्रकार के अनुबंध और योजनाएं न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ रही हैं, बल्कि उत्तराखंड की खेती और पशुपालन पर आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं।
🖋️ रिपोर्ट: मेरु रैबार न्यूज़ डेस्क
📍स्थान: टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड
